बयान से मुकरे कुरैशी, कृष्णा ने नहीं लिया था दिल्ली से निर्देश (राउंडअप)

इस्लामाबाद/नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। भारत-पाकिस्तान के बीच विदेश मंत्री स्तर की बातचीत और उसके बाद दोनों देशों के बीच मची तू-तू मैं-मैं के तीन दिनों बाद ही पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी अपने बयान से मुकर गए। उन्होंने इस बात से साफ इंकार कर दिया कि उन्होंने कहा था कि द्विपक्षीय वार्ता के दौरान विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा नई दिल्ली से निर्देश ले रहे थे।

कुरैशी यह भी कहा कि वह भारत का दौरा करेंगे, लेकिन उनका दौरा दिल बहलाने के लिए नहीं होगा। भारत ने भी इस बात की सफाई दी है कि दोनों देशों के बीच वार्ता टूटी नहीं है।

गुरुवार को वार्ता के दौरान कृष्णा के नई दिल्ली से नीतिगत मामलों पर निर्देश लेने की टिप्पणी करके हंगामा खड़ा करने वाले कुरैशी ने रविवार को संवाददाताओं से कहा, "मैंने कभी नहीं कहा कि भारतीय मंत्री वार्ता के दौरान नई दिल्ली से निर्देश लेने के लिए बार-बार बाहर गए।"

समाचार पत्र 'द न्यूज' के अनुसार कुरैशी ने स्पष्टीकरण दिया है कि कृष्णा नहीं वरन भारतीय प्रतिनिधिमंडल का एक सदस्य नई दिल्ली को यथास्थिति से अवगत करा रहा था और वहां से निर्देश ले रहा था।

कृष्णा से वार्ता के एक दिन बाद शुक्रवार को कुरैशी ने टेलीविजन चैनलों पर खुलेआम यह कहा था कि कृष्णा नीतिगत मामलों पर नई दिल्ली से फोन से निर्देश हासिल कर रहे थे। इसके बावजूद पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने रविवार को इसका खंडन किया है।

इसके पहले कुरैशी ने शनिवार को कहा था कि जब तक भारत सभी विवादित मुद्दों पर 'गंभीर और अर्थपूर्ण' वार्ता के लिए तैयार नहीं होता तब तक वह नई दिल्ली के दौरे पर नहीं जाएंगे।

एक संवाददाता द्वारा भारत दौरे के निमंत्रण के बारे में पूछे जाने पर कुरैशी ने कहा था, "मैं मन बहलाने के लिए दिल्ली नहीं जाऊंगा, मैं तभी जाऊंगा जब भारत अर्थपूर्ण, नतीजापरक और सकारात्मक वार्ता के लिए तैयार हो।"

गुरुवार को विश्वास बहाली के लिए दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच हुई बातचीत गतिरोध के साथ संपन्न हुई थी। दोनों देश हालांकि वार्ता को आगे जारी रखने पर सहमत हुए थे और भारतीय विदेश मंत्री एस. एम. कृष्णा ने कुरैशी को नई दिल्ली आने का न्योता दिया था।

कुरैशी ने कहा, "हमने मुंबई हमले और आतंकवाद के बारे में उनकी चिंताओं को सुना और उन्हें भी हमारी सीमाओं को समझना चाहिए। यदि वे अपनी जनता के प्रति जवाबदेह हैं तो हम भी लोकतांत्रिक देश हैं और हम भी पाकिस्तान की संसद और जनता के प्रति जवाबदेह हैं।"

भारतीय विदेश मंत्री के साथ वार्ता में उठाए गए मुद्दों के बारे में पूछे जाने पर कुरैशी ने कहा कि कोई नया मुद्दा नहीं था और सभी मुद्दे स्थगित समग्र वार्ता से जुड़े हुए थे।

भारतीय प्रतिनिधिमंडल के नई दिल्ली से निर्देशित होने की बात कह कर विवाद पैदा करने वाले कुरैशी ने समाचार पत्र डॉन से बातचीत में एक नया खुलासा किया।

कुरैशी ने कहा कि वह और कृष्णा कुछ मुद्दों पर सहमत हो गए थे, लेकिन नई दिल्ली से कृष्णा को मिले 'निर्देशों' के बाद समझौता नहीं हो सका। कृष्णा और उनके प्रतिनिधिमंडल से कहा गया था कि ये मुद्दे उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर के हैं।

कृष्णा अभी इस्लामाबाद में ही थे तभी कुरैशी ने टेलीविजन पर प्रसारित एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि भारत वार्ता को संकुचित कर रहा है। भारतीय विदेश मंत्री बैठक के दौरान लगातार नई दिल्ली से नीतिगत निर्देश हासिल कर रहे थे।

कुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान सभी मुद्दों पर भारत के साथ सीधी और स्पष्ट वार्ता चाहता है लेकिन भारत सीमित मुद्दों पर बात करना चाहता है।

इसके एक दिन पहले दोनों देशों ने उस व्यापक धारणा को नकारने की कोशिश की थी कि 15 जुलाई की बातचीत एक गतिरोध में समाप्त हो गई।

भारतीय विदेश सचिव निरूपमा राव ने जोर देकर कहा कि वार्ता टूटी नहीं है और संवाद प्रक्रिया हर हाल में जारी रहेगी। लेकिन यहीं पर उन्होंने पाकिस्तान से यह आत्मविश्लेषण करने के लिए भी कहा कि आखिर भारत के खिलाफ आतंकी मशीनरी का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है।

राव ने एनडीटीवी के साथ एक साक्षात्कार में शनिवार को कहा था, "मैं यह कहने के लिए मजबूर हूं कि वहां राज्यीय और गैर राज्यीय ताकतें हैं और पाकिस्तान को आत्ममंथन की पूरी प्रक्रिया से गुजरने की आवश्यकता है, खासतौर से यह समझने के लिए कि आखिर आतंकवाद खुद पाकिस्तान के ताने-बाने के लिए अब क्यों खतरा बन रहा है।"

राव ने कहा कि दोनों पक्षों ने अविश्वास को कम करने के लिए संवाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए विभिन्न विचारों पर चर्चा की है। उन्होंने कहा, "सोच में फर्क है। लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच इतनी चौड़ी खाई नहीं है, जिसे पाटा न जा सके।"

राव ने कहा, "दोनों पक्षों की उम्मीदों के बीच एक दूरी है और हमारे पास करने के लिए एक बहुत ही स्पष्ट बात थी, वह यह कि हम सोचते थे कि हम पाकिस्तान के साथ चर्चा करेंगे। लेकिन पाकिस्तान थोड़ी अलग उम्मीद के साथ आया। मैं सोचती हूं कि पाकिस्तान का मकसद था कि समग्र संवाद की प्रक्रिया बहाल की जाए।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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