बांग्लादेश में उल्फा नेता रंजन गिरफ्तार (राउंडअप)

ढाका/शिलांग/नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के प्रमुख उग्रवादी नेता रंजन चौधरी उर्फ मेजर रंजन और प्रदीप मारक को बांग्लादेश पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस बीच केंद्रीय गृह सचिव जी. के. पिल्लै ने रविवार को कहा कि सरकार को इस गिरफ्तारी के बारे में बांग्लादेश से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

धुबरी जिले में उल्फा का महासचिव रह चुके 46 वर्षीय चौधरी को बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) ने गिरफ्तार किया। चौधरी उर्फ मेजर रंजन (46), के अलावा उसके बांग्लादेशी सहयोगी प्रदीप मारक (57) को उत्तरपूर्वी बांग्लादेश के भैरव जिले में लक्ष्मीपुर गांव से गिरफ्तार किया गया है। चौधरी धुबरी जिले में उल्फा का महासचिव रह चुका है। आरएबी ने उसके अड्डे से एक पिस्टल, एक रिवाल्वर, चार हाथ से बने बम और बम बनाने की सामग्री बरामद की है।

बांग्लादेश में रविवार को प्रकाशित समाचार पत्रों में कहा गया कि चौधरी को बांग्लादेश पुलिस ने छह सप्ताह पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। रंजन ने बांग्लादेश में गिरफ्तारी से बचने के लिए अपना नाम बदलकर मसूद चौधरी रख लिया था। बांग्लादेश में गिरफ्तारी से बचने के लिए आमतौर पर उग्रवादी नेता यहां की स्थानीय लड़कियों से शादी कर लेते हैं और चौधरी ने भी यहां की एक लड़की से शादी कर ली थी।

चौधरी को शनिवार को मीडिया के समक्ष पेश किया गया था। समाचार पत्र 'न्यू नेशन' के मुताबिक संभवत: यह वही मसूद रंजन चौधरी है जिसे पुलिस ने छह सप्ताह पहले गिरफ्तार किया था। इसे 6 जून को मेमनसिंह कस्बे के रुम्पा अस्पताल से सादा कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने तब गिरफ्तार कर लिया था जब वह घायल होने के बाद यहां भर्ती हुआ था।

बांग्लादेशी अधिकारियों का कहना है कि पिछले दिसंबर के बाद से उल्फा के बड़े नेताओं की गिरफ्तारी के बाद से चौधरी ही यहां से हिंसा की वारदातों का संचालन कर रहा था।

केंद्रीय गृह सचिव जी. के. पिल्लै ने नई दिल्ली में आईएएनएस से कहा, "हमने इस गिरफ्तारी की खबर समाचार पत्रों में देखी है लेकिन बांग्लादेश के अधिकारी हमें आधिकारिक रूप से इसकी जानकारी उपलब्ध कराएंगे।"

उल्फा उग्रवादी को बांग्लादेश से भारत लाकर मामला चलाने के बारे में पूछे जाने पर गृह सचिव ने कहा, "निश्चित रूप से हम आधिकारिक तरीके से ऐसा करेंगे।"

मारक की राष्ट्रीयता के बारे में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। मारक गारो जनजाति का है और बांग्लादेश में भी काफी संख्या में गारो लोग रहते हैं।

वर्ष 1995 में भी भूटान में उल्फा के महासचिव अनूप चेतिया से मिलकर लौटे चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। अनूप चेतिया 1997 से जेल में है।

पिछले साल दिसंबर में बांग्लादेश में उल्फा के प्रमुख अरविंद राजखोवा और राजू बरुआ समेत संगठन के आठ अन्य नेताओं की गिरफ्तारी की गई थी।

इसके अलावा ढाका ने नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के प्रमुख रंजन दायमेरी को भी भारत को सौंपा है।

रंजन दायमेरी बांग्लादेश में रह रहा पांचवां बड़ा अलगाववादी नेता था। उल्फा के सैन्य प्रमुख परेश बरुआ के भी बांग्लादेश में होने की संभावना है। बरुआ ने भी एक बांग्लादेशी लड़की से शादी की है।

समाचार पत्र 'डेली स्टार' के मुताबिक आरएबी के इंटेलीजेंस विंग के प्रमुख लेफ्टिनेंट कर्नल जियाउल अहसान ने कहा, "बांग्लादेश में अपना ठिकाना बनाकर उल्फा के नेता भारत में अपनी गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। इन्हीं में से एक इस संगठन का प्रमुख नेता रंजन चौधरी अब जेल में है।"

अहसान ने कहा कि आरएबी देश में इस संगठन के शस्त्रागार का पता लगाने में जुटी है।

आरएवी के प्रमुख मेजर जनरल हसन महमूद खांडेकर ने कहा, "हम यह पता लगा रहे हैं कि यहां उल्फा के संबंध किस उग्रवादी संगठन से हैं और यहां इस संगठन के और कितने नेता छुपे हुए हैं।"

आरएबी के कानूनी और मीडिया विंग के निदेशक कमांडर मोहम्मद सोहेल ने कहा कि चौधरी ने जिनाईघाटी उपजिले के गजनी गांव में 1997 में एक स्थानीय लड़की से शादी की थी वह कई बार भारत जा चुका है। उन्होंने कहा कि वह देश में अवैध रूप से दाखिल हुआ था।

पिछले साल जनवरी में प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद से शेख हसीना ने भारत और बांग्लादेश के बीच अपराधों पर नियंत्रण और उग्रवादियों एवं आतंकवादियों पर लगाम कसने के लिए आपसी सहयोग में वृद्धि की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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