उल्फा नेता की गिरफ्तारी की पुष्टि का इंतजार : पिल्लै
शिलांग/नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय गृह सचिव जी. के. पिल्लै ने रविवार को कहा कि सरकार को युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के प्रमुख उग्रवादी नेता रंजन चौधरी उर्फ मेजर रंजन सहित दो उग्रवादियों के गिरफ्तार होने की बांग्लादेश से आधिकारिक पुष्टि होने का इंतजार है।
पिल्लै ने नई दिल्ली में आईएएनएस से कहा, "हमने इस गिरफ्तारी की खबर समाचार पत्रों में देखी है लेकिन बांग्लादेश के अधिकारी हमें आधिकारिक रूप से इसकी जानकारी उपलब्ध कराएंगे।"
उल्फा उग्रवादी को बांग्लादेश से भारत लाकर मामला चलाने के बारे में पूछे जाने पर गृह सचिव ने कहा, "निश्चित रूप से हम आधिकारिक तरीके से ऐसा करेंगे।"
बांग्लादेश की रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) ने शनिवार को गिरफ्तार उल्पा नेता रंजन चौधरी उर्फ मेजर रंजन और उसके बांग्लादेशी सहयोगी प्रदीप मारक को ढाका में मीडिया के समक्ष पेश किया।
चौधरी धुबरी जिले में उल्फा का महासचिव रह चुका है। आरएबी ने उसके अड्डे से एक पिस्टल, एक रिवाल्वर, चार हाथ से बने बम और बम बनाने की सामग्री बरामद की है।
मारक की राष्ट्रीयता के बारे में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है। मारक गारो जनजाति का है और बांग्लादेश में भी काफी संख्या में गारो लोग रहते हैं।
वर्ष 1995 में भी भूटान में उल्फा के महासचिव अनूप चेतिया से मिलकर लौटे चौधरी को गिरफ्तार किया गया था। अनूप चेतिया 1997 से जेल में है।
पिछले साल दिसंबर में बांग्लादेश में उल्फा के प्रमुख अरविंद राजखोवा और राजू बरुआ समेत संगठन के आठ अन्य नेताओं की गिरफ्तारी की गई थी।
इसके अलावा ढाका ने नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के प्रमुख रंजन दायमेरी को भी भारत को सौंपा है।
रंजन दायमेरी बांग्लादेश में रह रहा पांचवां बड़ा अलगाववादी नेता था।
पिछले साल जनवरी में प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद से शेख हसीना ने भारत और बांग्लादेश के बीच अपराधों पर नियंत्रण और उग्रवादियों एवं आतंकवादियों पर लगाम कसने के लिए आपसी सहयोग में वृद्धि की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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