भारतीय चिकित्सक कनाडा में शीर्ष पर पहुंचा
गुरमुख सिंह
टोरोनाटो, 18 जुलाई (आईएएनएस)। ऐसा देखा गया है कि भारत से कनाडा में आकर कई चिकित्सक टैक्सी चलाने लगते हैं, क्योंकि उनकी डिग्री को यहां मान्यता नहीं मिलती। ऐसे में कुछ ही चिकित्सक खुद को कनाडा में स्थापित कर पाते हैं। लेकिन अमृतसर में जन्मे फिजीशियन बिरिंदर अहलूवालिया ने इस पेशे में खुद को शीर्ष तक पहुंचाया है।
अहलूवालिया ने यहां बीएसए डायग्नोस्टिक मेडिकल इमेज सेंटर स्थापित किया है जो देश का सबसे बड़ा और बेहतर स्वास्थ्य केंद्र माना जाता है।
अहलूवालिया, जिन्हें सांस्कृतिक मंडली में चरखा फिल्मोत्सव के संस्थापकों में से एक माना जाता है, ने आईएएनएस को बताया, "पिछले वर्ष हमने 70,000 मरीजों का इलाज किया था। इस वर्ष यह संख्या और बढ़ सकती है। मुझे नहीं लगता कि कनाडा में कोई और स्वास्थ्य केंद्र हम से ज्यादा मरीजों का इलाज करता होगा।"
चिकित्सा और सांस्कृतिक क्षेत्र में उनके योगदान के कारण अहलूवालिया को 25 शीर्षस्थ सफल प्रवासियों में शुमार किया गया। पिछले वर्ष कनाडा के प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने भारत यात्रा के दौरान उन्हें साथ चलने का न्योता दिया था।
अमृतसर मेडिकल कालेज के पूर्व छात्र अहलूवालिया ने कहा, " प्रधानमंत्री ने जब भारत दौरे में मुझे साथ चलने को कहा तो मुझे बहुत खुशी हुई। उन्होंने मुझे यह मौका शायद इसलिए दिया, क्योंकि भारत और कनाडा एक-दूसरे के यहां चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देना चाहते हैं।"
बिरिंदर के पिता बलबीर सिंह अहलूवालिया अमृतसर मेडिकल कालेज में ही पढ़ाते हैं।
बिरिंदर 1985 में टोरंटो पहुंचे और अन्य प्रवासियों की तरह उन्होंने भी निचले स्तर से यहां काम शुरू किया।
वह याद करते हैं, "हां, भारत में मैं योग्य चिकित्सक माना जाता था, लेकिन यहां मैंने कोरियर-ब्यॉय के रूप में काम शुरू किया। बाद में मैं आरडीएस डायग्नोस्टिक्स के प्रमुख का सहायक बन गया। फिर डायग्नोस्टिक इमेजिंग विशेषज्ञ का प्रशिक्षण लिया।"
फिर किस्मत ने साथ दी और डायग्नोस्टिक इमेजिंग में कामयाबी हासिल कर इस युवा भारतीय ने दिखा दिया कि इस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।
उन्होंने वर्ष 1989 में बीएसए डायग्नोस्टिक इमेजिंग सेंटर की स्थापना की और उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications