'विकलांग व्यक्ति को कम मुआवजा नहीं दिया जा सकता'
अदालत ने यह आदेश एक मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (एमएसीटी) के उस आदेश को दरकिनार करते हुए दिया, जिसमें एक विकलांग दुर्घटना पीड़ित को इस आधार पर कम मुआवजा मुकर्रर किया गया था, क्योंकि उसका एक पैर पहले से पोलियोग्रस्त था।
न्यायमूर्ति एस.एन.ढींगरा ने कहा कि दुर्घटना के समय किसी व्यक्ति की विकलांगता पर विचार किए जाने की जरूरत नहीं है और मुआवजा घायल व्यक्ति के ऊपर हुए दुर्घटना के प्रभाव के आधार पर तय किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति ढींगरा ने कहा, "न्यायाधिकरण को घायल व्यक्ति पर हुए दुर्घटना के प्रभाव को देखना चाहिए था। यदि घायल व्यक्ति का एक पैर पहले से पोलियोग्रस्त था तो भी उसका दूसरा पैर पूरी तरह स्वस्थ था और वह व्यक्ति अपने उस एक पैर से अपनी आजीविका कमाने में सक्षम था।"
अदालत ने शाहिद अली के लिए न्यायाधिकरण द्वारा पारित मुआवजे की राशि 50,000 रुपये से बढ़ा कर 1.5 लाख रुपये कर दिया। ज्ञात हो कि दुर्घटना में उसके दोनों पैर की हड्डी टूट गई थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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