उप्र में फरियादी पुलिसकर्मी को भी रोना पड़ता है
शहर के पुलिस लाइन में रहने वाली दरोगा मधुबाला गुप्ता की बेटी पिछले आठ जुलाई से गायब है। मधुबाला का कहना है कि उसका अपहरण किया गया है।
मधुबाला ने रविवार को संवाददादातों से कहा, मैं गुहार लगाती रही कि मेरी बेटी को गायब किया गया है, उसका अपहरण हुआ है। लेकिन पुलिस केवल गुमशुदगी दर्ज करके चुप बैठी थी। अपहरण की धारा में मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच नहीं कर रही थी।
मधुबाला का आरोप है कि उसके ससुराल के लोग- जेठ और उनके तीन बेटों ने संपत्ति के लालच में उनकी बेटी को गायब किया है।
पुलिस अधिकारी कृष्णमोहन ने कहा कि मधुबाला के जेठ राधेश्याम और उनके तीन बेटों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। प्रारंभिक जांच में उनके द्वारा अपहरण की बात साबित नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए पुलिस की तीन टीमें गठित की गई हैं। मामले की सघन जांच की जा रही है। जल्द ही लापता किशोरी को बरामद कर लिया जाएगा।
शहर के सदर बाजार थाने के सामने अपनी बेटी की तस्वीर लिए रोती-बिलखती महिला दरोगा मधुबाला ने शनिवार शाम जब आत्मदाह की धमकी दी और स्थानीय समाचार चैनलों ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया तो रविवार सुबह अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण की धारा में उसकी रिपोर्ट दर्ज की गई।
कुछ साल पहले पुलिस विभाग में तैनात मधुबाला के पति की मौत के बाद उन्हें विभाग द्वारा नौकरी दी गई थी। वह पुलिस कार्यालय में प्रधान लिपिक के पद पर तैनात हैं।
मधुबाला की 15 वर्षीय बेटी डॉली गत आठ जुलाई को डांट-फटकार से गुस्सा होकर नानी के घर जाने के लिए निकली, लेकिन उसके बाद से वह लापता है। मधुबाला ने उसकी बहुत खोजबीन की, लेकिन उसका कहीं पता नहीं चला। वह अपनी फरियाद लेकर स्थानीय सदर बाजार थाने पहुंची और मामला दर्ज कराने की तहरीर दी, लेकिन पुलिस ने उसकी एक न सुनी।
परेशान मधुबाला ने आला पुलिस अधिकारियों के दफ्तरों के भी चक्कर लगाए, लेकिन वहां से कुछ हासिल नहीं हुआ।
जब मीडिया ने शनिवार को मामले को प्रमुखता से उठाया तो पुलिस अधीक्षक के आदेश पर अज्ञात लोगों के खिलाफ अपहरण की धारा में मुकदमा दर्ज किया गया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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