साइबर हमलों से निपटने के लिए तैयार है सेना
नई दिल्ली, 18 जुलाई (आईएएनएस)। देश की सेना साइबर क्षेत्र में तेज हो रहे इलेक्ट्रानिक युद्ध में तकनीकी कौशल के जरिए दुश्मनों के हमलों को बेअसर करने में सक्षम है।
सेना के मुख्यालय में एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा, "सेना विभिन्न देशों और आतंकवादी ताकतों (नॉन स्टेट एक्टर) की ओर से साइबर खतरे के प्रति सतर्क है और साइबर सुरक्षा के लिए हमारे पास उच्च मानकों पर आधारित सुरक्षित नेटवर्क मौजूद है।"
अधिकारी ने कहा कि सेना ने अपनी कार्यप्रणाली में साइबर खतरों से सुरक्षा के लिए अभेद और पूरी तरह सुरक्षित वाइड एरिया नेटवर्क स्थापित किया है।
सेना के अधिकारियों का कहना है कि वे नई पीढ़ी के खतरों का सामना कर रहे हैं और चीनी और पाकिस्तानी जासूसों द्वारा देश के सैन्य संगठनों को निशाना बनाए जाने की खबरों के बाद साइबर युद्ध की आशंका से चिंतित हैं।
व्यावसायिक और शौकिया हैकरों के हमले दुनियाभर में बढ़ रहे हैं। देश के प्रमुख व्यावसायिक, कूटनीतिक और रणनीतिक दस्तावेजों पर चीनी और पाकिस्तानी हैकरों के हमले पहले की तुलना में बढ़े हैं।
साइबर उद्योग के आंकड़ों के मुताबिक चीनी और पाकिस्तानी हैकर दुनियाभर से प्रतिदिन 60 लाख फाइलें चुरा रहे हैं।
अमेरिका की डिफेंस सिस्टम्स पत्रिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक हर 0.79 सेकेंड में एक नए तरीके से हैकिंग की जा रही है।
हालांकि देश की सेना पूरी तरह से आश्वस्त है। अधिकारियों ने कहा कि सेना की सभी गुप्त सूचनाएं ऐसे पासवर्ड से लॉक की जाती हैं जिन्हें हैक नहीं किया जा सकता और ये वायरस और वार्म्स से पूरी तरह सुरक्षित होती हैं।
आतंकवादी संगठन प्रशिक्षित हैकरों को दुनियाभर से सूचनाएं एकत्र करने में लगाते हैं, ऐसे में सेना भी समय-समय पर अपनी साइबर सुरक्षा नीति की समीक्षा करती है।
सेना की प्रमुख इलेक्ट्रानिक संरचनाओं की सुरक्षा और हैकर्स के हमले के समय त्वरित प्रतिक्रिया के लिए सेना ने कम्प्यूटर इमर्जेसी रिस्पोंस टीम (सीईआरटी) का गठन किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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