त्वरित न्यायालय योजना की अवधि बढ़ी
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने पत्रकारों को बताया कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित आर्थिक मामलों पर मंत्रीमंडलीय समिति की बैठक में दशक भर पुरानी त्वरित न्यायालय योजना के विस्तार का यह फैसला लिया गया।
उन्होंने कहा कि अब यह योजना 31 मार्च 2011 तक जारी रहेगी। इस योजना के तहत देश में स्थापित सभी 1,562 त्वरित न्यायालयों को 4.8 लाख प्रति न्यायालय के हिसाब से दिया जा रहा अनुदान एक साल तक और जारी रहेगा।
मंत्री ने कहा कि संसद ने पहले ही 75 करोड़ रुपये के इस अनुदान को मंजूरी दे दी है।
पिछले 10 साल में त्वरित न्यायालयों ने उन्हें हस्तांतरित किए गए 35.02 लाख मामलों में से 28.38 लाख मामलों का निपटारा किया है।
ग्यारहवे वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर वर्ष 2000-01 में 1,743 त्वरित न्यायालयों का गठन किया गया था।
वित्त मंत्रालय ने इन 1,743 न्यायालयों की स्थापना के लिए 502.90 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। इन न्यायालयों की स्थापना पांच साल के लिए की गई थी।
वर्ष 2005 में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना को कांग्रेस के नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने विस्तार देने से इंकार कर दिया था लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद इस योजना को पांच साल के लिए बढ़ा दिया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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