छात्राओं की मुस्कान की वजह बनी साइकिल योजना
इस योजना की शुरुआत 2007-08 में की गई थी। इसके बाद से अब तक 13 लाख से ज्यादा लड़कियों को इस योजना का लाभ मिल चुका है। शिक्षा विभाग में दर्ज आंकड़ों के मुताबिक पहले वर्ष में इस योजना के तहत एक लाख, 63 हजार लड़कियों को साइकिल दी गई थी।
इसके बाद 2008-09 में दो लाख, 72 हजार तथा वर्ष 2009-10 में चार लाख, 36 हजार लड़कियों को साइकिल के लिए राशि दी गई। वर्ष 2010-11 में चार लाख, 90 हजार लड़कियों को यह सुविधा दी जानी है। गौरतलब है कि एक लडकी को 2,000 रुपए साइकिल के लिए दिए जाते हैं। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2007-08 के प्रारंभ में विद्यालय से बाहर रहने वाले 25 लाख बच्चों की संख्या इस वितीय वर्ष के प्रारंभ में घटकर 7.70 लाख रह गई है।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब ब्लॉग लिखना प्रारंभ किया था तो उन्होंने भी अपने ब्लॉग की शुरुआत भी मुख्यमंत्री साईकिल योजना की चर्चा से की थी। राज्य शिक्षा विभाग के सचिव अंजनी कुमार सिंह भी इस योजना को बेहद कारगर मानते हैं।
साइकिल योजना का असर स्कूलों में छात्राओं की बढ़ी संख्या से मालूम पड़ता है। मिसाल के तौर पर पटना में बांकीपुर बालिका उच्च विद्यालय में इस योजना के शुभारंभ से पहले जहां नौवीं कक्षा में चार वर्ग होते थे वहीं अब इनकी संख्या 10 को पार कर गई है।
औरंगाबाद जिले के दधपा ग्राम पंचायत की मुखिया मीरा देवी भी मानती हैं कि इस योजना से गांवों की लड़कियों को काफी फायदा हुआ है। कल तो जो लड़कियों आवागमन की सुविधा के कारण मध्य विद्यालय तक की पढ़ाई कर छोड़ देती थी वे आज उच्च विद्यालय में पढ़ाई कर रही हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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