एल एण्ड टी को 12,000 करोड़ रुपये का मेट्रो रेल का ठेका
तीन सदस्यीय समिति ने इस विशाल परियोजना के लिए बोली लगाने वाली छह कंपनियों में से एल एण्ड टी को इस परियोजना के लिए चुना है। इससे पहले 2008 में मेटास इंफ्रा को इस काम के लिए चुना गया था।
सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज में घोटाला उजागर होने के बाद इसकी सहयोगी कंपनी मेटास इंफ्रा इस परियोजना के लिए जरूरी वित्तीय आवश्यताएं नहीं जुटा पाई थी इसके बाद प्रसासन ने नई वैश्विक बोली मंगाने का फैसला किया था।
इसके लिए शुरुआत में आठ समूहों ने बोली जमा थी जिसमें रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्टर, लेंको इंफ्राटेक, जीवीके, जीएमआर, एल एण्ड टी, सोमा स्ट्रावर्ग, ट्रांसट्रॉय और एस्सार ग्रुप के नेतृत्व वाले समूह शामिल थे।
बदले हुए परिवेश में इस परियोजना की वित्तीय व्यावहारिकता को कमजोर मानते हुए जीवीके और जीएमआर ने अपनी बोली वापस ले ली थी।
कुल 71.6 किलोमीटर लंबी एलीवेटेड मेट्रो रेल परियोजना को सार्वजनिक निजी भागीदारी के आधार पर बनाओ, चलाओ और स्तांतरित करो (डीबीएफओटी) आधार पर बनाया जाना है।
इस परियोजना का काम अक्टूबर से शुरू होगा और अगले चार साल में इस काम को पूरा किया जाएगा।
मेटास के नेतृत्व वाले समूह ने 2008 में इस परियोजना की बोली जीती थी। सरकार ने इस समूह पर 71 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है। समूह ने कार्य निष्पादन की गारंटी और 35 साल की रियायत अवधि के बाद सरकार को 30,311 करोड़ रुपये का भुगतान करने का प्रस्ताव दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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