राजस्थान में भाजपा कार्यकारिणी में संघ का दबदबा

जयपुर,, 14 जुलाई (आईएएनएस)। राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की साल भर इंतजार के बाद कल गठित हुई प्रदेश कार्यकारिणी में पार्टी की राष्ट्रीय महामंत्री और राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने समर्थकों को शामिल करवाने में कामयाब रही हैं।

लेकिन राजे के नजदीकी पूर्व मंत्री राजेन्द्र राठौड़ सहित राजे गुट के कई अहम नेताओं को संगठन की जिम्मेदारियों से अलग रखा गया है। तमाम विरोधों के बावजूद एक साल पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की खास पसंद के रूप में प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी पर बैठे युवा तुर्क अरूण चतुर्वेदी ने गुटबाजी को विराम देने के लिए राजे और उनके कट्टर विरोधी रहे पूर्व विदेशमंत्री जसवंत सिंह सहित तमाम पूर्व प्रदेशाध्यक्षों को स्थाई सदस्य के रूप में संगठन से जोड़ने का प्रयास भी किया है।

चतुर्वेदी ने इस संबंध में कहा कि कार्यकारिणी में युवाओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं को शामिल करने प्रयास किया गया है जिसके कारण इस बार कई पदों पर नये चहरे सामने आए हैं। इसके अलावा पार्टी संविधान के मुताबिक महिलाओं को प्रतिशत आरक्षण के तहत नौ पद दिए गए हैं। चतुर्वेदी ने कहा कि इस साल मई तक तो पूर्व कार्यकारिणी ही कार्यरत थी इस लिए नई कार्यकारिणी के गठन में दो माह का समय लगा है।

उन्होंने कहा कि पहले विधानसभा का बजट सत्र और उसके बाद पार्टी के कई महत्वर्पूण कार्यो के कारण कार्यकारिणी गठन में कुछ समय लग गया। उन्होंने कहा कि कार्यकारिणी में सभी तबकों और सभी संभागों को महत्व दिया गया है।

नई टीम में प्रदेश संगठन महामंत्री और कोषाध्यक्ष का पद अभी खाली रखा गया है। संगठन महामंत्री के संघ से आने का इंतजार है। प्रकाशचंद के इस पद से जाने के बाद से खाली चल रहा है। एक महामंत्री का पद भी खाली रखा गया है।

प्रदेशाध्यक्ष अरूण चतुर्वेदी ने मंगलवार को कार्यकारिणी की घोषणा की। इससे एक रोज पहले कार्यकारिणी को चतुर्वेदी और वसुंधरा राजे की मौजूदगी में राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने अंतिम रूप दिया। तीनों नेताओं की यह बैठक देर रात तक चली।

कार्यकारिणी में राज्य के सभी संभागों से नए चेहरों को मौका देने की कोशिश की गई है। पहली बार 256 सदस्यीय कार्यकारिणी में 100 से अधिक नए चेहरे लिए गए हैं। सभी 10 प्रदेश मंत्री नए हैं। सभी पूर्व प्रदेशाध्यक्षों, सांसदों, महापौर, उपमहापौर और जिला प्रमुखों को स्थायी आमंत्रित सदस्यों में शामिल किया गया है। चतुर्वेदी ने शहरी निकायों के निर्वाचित पदाधिकारियों को कार्यकारिणी में जगह देकर नई परम्परा शुरू की है।

वसुंधरा राजे गुट की तरफ से विपक्ष के नेता पद की दौड़ में शामिल रहे पूर्व मंत्री डा. दिगंबर सिंह और राव राजेन्द्र सिंह को उपाध्यक्ष बनाकर संगठन के कामकाज से जोड़ दिया गया है। माना जा रहा है कि दोनों अब स्वत: ही नेता प्रतिपक्ष पद की दौड़ से अलग हो गए हैं। इसके अलावा 10 उपाध्यक्षों में ओंकारसिंह लखावत, सुमन श्रंगी, नरेन्द्र कंवर, धनसिंह रावत, सुमन शर्मा, भगवती झाला, अजरुनराम मेघवाल और पहली बार विधायक बनी करौली की महारानी कीर्ति कुमारी को भी शामिल किया गया है।

संघ की पसंद माने जाने वाले सतीश पूनिया, मदन दिलावर और श्रीचंद कृपलानी को महामंत्री बनाया गया है। दस मंत्रियों में रामहेत यादव, प्रमोद सांमर, हिरेन्द्र शर्मा, सुनील कोठारी, दमयंती बेनीवाल, पब्बाराम विश्नोई, पुष्पा देवल, चंद्रकांता मेघवाल, अब्दुल सगीर व सरोज प्रजापत शामिल हैं। भवानी सिंह राजावत, सुनील भार्गव और नये चेहरे के रूप में ज्योति किरण को प्रदेश भाजपा का प्रवक्ता बनाया गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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