नक्सलियों के हाथों हर वर्ष 500 से अधिक नागरिकों की मौत : चिदंबरम
चिदंबरम के अनुसार जब तक इस प्रमुख वामपंथी आतंकवादी संगठन को प्रभावी चुनौती नहीं दी गई थी, इसने अपनी गतिविधियों के लिए इलाके का विस्तार किया, सदस्यों की भर्ती की, अधिकाधिक लोगों का अपहरण किया, जबरन वसूली की, हथियारों की लूट की और सुरक्षा बलों तथा आम नागरिकों को निशाना बनाया।
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाले नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा कि भाकपा (माओवादी) ने वर्ष 2004 से 2008 के बीच हर वर्ष औसतन 500 नागरिकों की हत्या की है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2009 में 591 नागरिकों की हत्या की गई, इनमें से 211 को पुलिस का मुखबिर करार दिया गया था। यह प्रवृत्ति वर्ष 2010 के पहले छह महीनों में भी कायम है और 325 नागरिकों को अब तक नक्सली मार चुके हैं। इनमें 142 को मुखबिर बताया गया था।
उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को पुलिस का मुखबिर करार देकर भाकपा (माओवादी) द्वारा की जा रही हत्या को लेकर केंद्र सरकार चिंतित है।
चिदंबरम ने कहा कि भाकपा (माओवादी) को स्वयंभू अदालतें बनाने का कोई अधिकार नहीं है। वास्तव में उसे हथियार रखने का अधिकार भी नहीं है। यह एक प्रतिबंधित संगठन है और कानून के दायरे से बाहर काम कर रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications