दिल्ली में हुई 1,375 हत्याओं की गुत्थी नहीं सुलझी
नई दिल्ली, 10 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली में अब तक हो चुकी कम से कम 1,375 हत्याओं की गुत्थी पुलिस नहीं सुलझा पाई। इनमें से ज्यादातर मामले पांच वर्षो से भी अधिक पुराने हैं। यह बात सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में सामने आई है।
सूचना के अधिकार के तहत आवेदन देने वाले देव आशीष भट्टाचार्य को पुलिस ने बताया कि हत्या के 1,375 मामलों में 644 मामले पांच वर्षो से भी अधिक पुराने हैं।
गृह मंत्रालय में मार्च में आवेदन दे चुके भट्टाचार्य ने बताया, "हत्या के अनसुलझे मामले 1,375 से कहीं अधिक हो सकते हैं, क्योंकि कुछ पुलिस स्टेशनों ने यह कहते हुए ब्योरा देने से इंकार कर दिया कि इसमें काफी समय लगेगा। कुछ ने अस्पष्ट ब्योरा दिया।"
उन्होंने कहा, "जब मीडिया ऊंचे घरानों में हुई वारदात को उछालता है, तब पुलिस जांच शुरू करती है, वरना हजारों मामलों को दबाए रखती है। नतीजतन हजारों पीड़ित परिवार अब भी न्याय के इंतजार में हैं।"
उन्होंने बताया कि अनसुलझे मामलोंे में से एक घटना नौ सितंबर, 2008 की है। दक्षिणी दिल्ली के गौतम नगर में बीपीओ कर्मी 22 वर्षीय युवती का शव उसके घर में मिला था। बैंक में काम करने वाले युवती के पिता उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से हर महीने दिल्ली आते थे। उन्हें उम्मीद थी कि डिफेंस कालोनी पुलिस उसकी बेटी के हत्यारे को गिरफ्तार करेगी, लेकिन वह अब तक न्याय की बाट जोह रहे हैं।
एक अन्य मामले के अनुसार उद्योगपति अनिल नंदा के लिए काम करने वाले 41 वर्षीय पूर्व सैनिक जनेश्वर शर्मा की संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। 80 प्रतिशत जले शर्मा को नौ जून, 2008 को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 15 जून को उनकी मौत हो गई। उनके भाई को अब तक पता नहीं चला है कि हत्यारा कौन था।
भट्टाचार्य को मुहैया कराए गए आंकड़ों के मुताबिक रोहिणी, अलीपुर, नरेला, सुल्तानपुरी और बवाना इलाकों में बड़ी संख्या में हुईं हत्याओं के मामले अब तक अनसुलझे हैं।
इसी तरह बाहरी दिल्ली के 336 मामले अनसुलझे रह गए। इनमें से 246 मामले पांच वर्ष से अधिक पुराने हैं।
उत्तर-पूर्वी जिले के 300 और दक्षिण-पूर्वी जिले के 161 मामलों में हत्यारों का सुराग नहीं लगा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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