मौत के 48 साल बाद सैनिक का अवशेष घर भेजा गया
तिनसुकिया (असम), 10 जुलाई (आईएएनएस)। अरूणाचल प्रदेश में हिमालय की चोटियों पर चीनी सेना के हाथों मारे जाने के 48 साल बाद सैनिक करम चंद के शव का अवशेष पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ शनिवार को हिमाचल प्रदेश में उसके गृहनगर भेजा गया।
सेना के एक कमांडर ने आईएएनएस को बताया, "सैनिक करम चंद का अवशेष आज (शनिवार को) ट्रेन के जरिए हिमाचल प्रदेश में पालमपुर प्रखण्ड के अगोचर गांव भेज दिया गया, ताकि पारिवारिक सदस्य पारंपरिक रीतिरिवाज के अनुसार उसका अंतिम संस्कार कर सकें।"
करम चंद, अरूणाचल प्रदेश में वालोंग के पास चीनी सेना द्वारा 23 अक्टूबर, 1962 को मोर्टार से दागे गए एक गोले की चपेट में आने के कारण शहीद हो गए थे। उस समय उनकी उम्र मात्र 21 साल थी।
करम चंद के साथ ही डोगरा रेजीमेंट के 12 और भारतीय सैनिक लापता हो गए थे।
जुलाई के प्रथम सप्ताह में किसी दिन सीमा सड़क कार्य बल (बीआरटीएफ) के कर्मचारी वालोंग के पास हुए एक भारी भूस्खलन द्वारा जाम हुए सड़क की सफाई में लगे हुए थे। इसी दौरान उन्हें युद्ध के दिनों के कुछ अवशेष मिले।
कमांडर ने कहा, "बीआरटीएफ के कर्मचारियों ने पहले वालोंग के पास शहीदों से संबंधित दो पहचान डिस्क पाया और उसके तत्काल बाद हमने सिख रेजीमेंट के सैनिकों को लेकर पांच जुलाई को व्यापक तलाशी अभियान शुरू कर दिया।"
चार दिनों की गहन खुदाई के बाद करम चंद के निजी सामान, उसकी पहचान डिस्क, चांदी की अंगूठी, उसके वेतन बुक का जीर्ण कवर और एक फाउंटेन पेन उस स्थल से बरामद हुआ, जहां से बीआरटीएफ कर्मियों ने अवशेष बरामद किया था।
सैन्य अधिकारी ने कहा, "खुदाई स्थल से खोपड़ियां और हड्डियां भी बरामद हुईं। हमने सभी अवशेषों को सावधानीपूर्वक इकट्ठा किया और उन्हें एक ताबूत में रखा, जिसे अब उसके पैतृक स्थान के लिए भेज दिया गया है।"
अधिकारी ने कहा, "बैज पर छपे पीआईएस नं. 3950976 से बाद में पुष्टि हो गई कि वह सैनिक करम चंद ही था, जिसका नाम शहीदों की सूची में दर्ज था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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