पीएसएलवी के प्रक्षेपण की तैयारियां पूरी
चेन्नई, 10 जुलाई (आईएएनएस)। श्रीहरिकोटा से सोमवार को होने वाले ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के प्रक्षेपण की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। यह यान पांच उपग्रहों को अंतरिक्ष की कक्षा में स्थापित करेगा।
कुल 44 मीटर लंबाई वाले पीएसएलवी में चार स्तर हैं और यह वैकल्पिक तौर पर ठोस एवं तरल प्रणोदकों का इस्तेमाल करता है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) के निदेशक एस. सतीश ने आईएएनएस से कहा, "सारा काम सामान्य तरीके से चल रहे हैं हम सोमवार के प्रक्षेपण के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।"
यहां से 80 किलोमीटर दूर स्थित श्रीहरिकोटा से यह प्रक्षेपण किया जाएगा। यह यान अपने साथ कुल 694 किलोग्राम वजन के काटरेसेट 2बी और एक अल्जीरियाई उपग्रह एटलस को अंतरिक्ष में स्थापित करेगा।
इसके अलावा कनाडा और स्विटजरलैंड के तीन छोटे उपग्रहों एनएलएस 6.1 और एनएलएस 6.2 को भी ले जाया जाएगा इनका विकास बेंगलुरू और हैदराबाद के इंजीनियरिंग विद्यालयों के छात्रों ने किया है।
इसरो अधिकारी ने बताया कि सभी उपग्रह रॉकेट में कुछ दिनों पहले ही रख दिए गए हैं।
रॉकेट का पहला और तीसरा स्तर ठोस प्रणोदक और दूसरा और चौथा स्तर तरल प्रणोदक से संचालित होगा।
इसरो के अधिकारियों के मुताबिक राकेट में ठोस ईंधन पहले ही भर दिया गया है लेकिन तरल ईंधन प्रक्षेपण से कुछ घंटे पहले ही भरा जाएगा।
रॉकेट के द्वारा स्थापित किया जाने वाला मुख्य उपग्रह काटरेसेट 2बी एक दूरसंवेदी उपग्रह है इस में खास तकनीक पर आधारित कैमरे लगे हैं जो विभिन्न इलाकों की तस्वीरें लेने में सक्षम हैं इसका उपयोग जमीन के नक्शे तैयार करने और भौगोलिक सूचनाएं एकत्र करने के लिए किया जाएगा।
इससे पहले काटरेसेट 2 और काटरेसेट 2ए को पहले ही अंतरिक्ष में स्थापित किया जा चुका है। इसरो के मुताबिक इन तीन उपग्रहों की पहुंच पूरे देश के भौगोलिक इलाके में होगी।
इसरो पिछले कई साल से एक बार में कई उपग्रह स्थापित करता रहा है। वर्ष 2008 में इसरो ने एक साथ 10 उपग्रह स्थापित करके विश्व रिकॉर्ड बनाया था।
इससे पहले इसरो ने गत नौ मई को प्रस्तावित प्रक्षेपण यान में दबाव को लेकर हल्की खामी के चलते टाल दिया था।
सतीश ने कहा, "यान के द्वितीय स्तर में आई गड़बड़ी ठीक कर ली गई है और अब हम पूरी तरह से तैयार हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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