रबड़ कीमतें बढ़ने से केरल के किसानों की चांदी

सानू जॉर्ज

कोट्टायम, 10 जुलाई (आईएएनएस)। देश में प्राकृतिक रबड़ की ऊंची कीमतों से केरल के रबड़ उगाने वाले किसान काफी खुश हैं। ऑटोमोबाइल क्षेत्र से रबड़ की मांग बढ़ने के कारण इसकी कीमत अब तक के सर्वोच्च स्तर 182 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई है।

सेवानिवृत्त कर्मचारी के. जी. थामस ने कहा, "आप इंतजार करिए दाम जल्द ही 200 रुपये प्रति किलो तक जा सकते हैं।"

थामस ने कहा, "मेरा पास आठ एकड़ जमीन है जहां मैं 1973 से रबड़ की खेती कर रहा हूं। जब रबड़ के दाम बेहद कम हो गए थे तब बाकी लोगों ने अपने रबड़ के पेड़ काट दिए थे लेकिन मैनें ऐसा नहीं किया मैनें इन्हें जिंदगीभर बनाए रखने का फैसला किया।"

सबसे ज्यादा रबड़ उत्पादन के मामले में दुनिया में भारत का चौथा स्थान है और यहां दुनिया के नौ प्रतिशत रबड़ का उत्पादन होता है। केरल में देश के कुल रबड़ के 81 प्रतिशत की पैदावार होती है।

केरल में वर्ष 2000 के 5,80,000 टन रबड़ उत्पादन की तुलना वर्ष 2005 में उत्पादन बढ़कर 6,91,000 टन हो गया था। वर्ष 2009 में यहा उत्पादन बढ़कर 7,83,000 टन हो गया।

मॉनसून के दौरान बाजार में रबड़ की आपूर्ति कम हो जाती है इसके चलते रबड़ की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।

प्राकृतिक रबड़ उत्पादक देशों के संगठन ने जून में एक बयान में कहा कि दुनियाभर में रबड़ की कमजोर आपूर्ति और खासकर चीन की बढ़ती मांग के चलते कीमतों में वृद्धि होगी।

रबड़ कीमतों में पिछले पांच साल में लगातार बढ़ोतरी हुई है। चार साल पहले रबड़ के दाम 100 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंचे थे। इसके बाद से कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

केरल के एक रबड़ व्यापारी के मनोज का कहना है कि रबड़ की कीमतें अगली तिमाही में 225 रुपये प्रति किलो के पार जा सकती हैं।

मनोज ने कहा, "आप भारत सहित दुनियाभर में वाहनों की बिक्री के आंकड़े देखिए, इनमें 30 प्रतिशत की दर से बढ़ोतरी हो रही है। चीन दुनिया में प्राकृतिक रबड़ का सबसे बड़ा आयातक है। चीन ने कहा है कि वह इस साल अपने पिछले साल के 15 लाख टन रबड़ के आयात से ज्यादा आयात करेगा।

इसके अलवा दुनिया के सबसे बड़े रबड़ उत्पादक थाईलैंड में इस साल भारी बारिश के कारण रबड़ का उत्पादन प्रभावित होगा जिससे कीमतों में और बढ़ोतरी के आसार हैं।"

प्राकृतिक रबड़ का उपयोग मुख्यत: गाड़ियों के टायर बनाने में होता है। इसके अलावा इससे गद्दे, रबड़ बैंड और अन्य उत्पाद भी बनाए जाते हैं। पिछले कुछ बरसों से पेट्रोलिय उत्पाद से बनने वाली रबड़ की तुलना में प्राकृतिक रबड़ का उपयोग बढ़ा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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