एमबीबीएस प्रवेश में रियायत संबंधी याचिका खारिज
न्यायमूर्ति बदर दुरेज अहमद और न्यायमूर्ति वीणा बीरबल की खण्डपीठ ने कहा, "शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को भारतीय चिकित्सा परिषद कानून-1956 के तहत सभी अधिकार, सुविधाएं और लाभ दिए जाने चाहिए, ताकि उनके साथ भेदभाव न हो पाए और वे समाज की मुख्यधारा में आ सकें। लेकिन हम इस तर्क से सहमत नहीं हैं कि याची जरूरी न्यूनतम अंकों में रियायत पाने के मामले में एससी/एसटी (अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति) के उम्मीदवारों से बराबरी के लिए दावा कर सकता है।"
दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा मोहम्मद शाह अफजल को एमबीबीएस पाठ्यक्रम में प्रवेश देने से इंकार किए जाने के बाद उसने अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उसने अपनी याचिका में कहा है कि शारीरिक रूप से अक्षम उम्मीदवारों को भी एससी/एसटी उम्मीदवारों के बराबर रियायतें दी जानी चाहिए।
65 प्रतिशत विकलांगता का शिकार अफजल ने दिल्ली विश्वविद्यालय की मेडिकल प्रवेश परीक्षा-2008 में शामिल हुआ था। उसे परीक्षा में 41.5 प्रतिशत अंक मिले थे, जो कि भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) द्वारा तय न्यूनतम पात्रता मानदंड से कम है। शारीरिक रूप से अक्षम उम्मीदवार के लिए न्यूनतम अहर्ता अंक 50 प्रतिशत है।
अफजल दोबारा 2009 में परीक्षा में सम्मिलित हुआ और उसे 37 प्रतिशत अंक प्राप्त हुआ।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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