लॉबिंग के चलते रद्द हुआ नेपाल से पासपोर्ट समझौता
भारत में सरकारी क्षेत्र की कंपनी सिक्योरिटी प्रिंटिंग और मिंटिंग कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड को नेपाल के करीब 40 लाख मशीन से पढ़े जा सकने वाले पासपोर्ट प्रिंट करने का सौदा मिला था लेकिन नेपाल की माओवादी पार्टी के विरोध के कारण अप्रैल में इसे रद्द कर दिया गया था।
विरोधियों का कहना था कि सौदे में अनियमितता बरती गई है और कंपनी के चयन में नियमों का पालन नहीं किया गया है।
सौदे को रद्द कराने के लिए नेपाली माओवादियों द्वारा आम हड़ताल की घोषणा और नेपाली सर्वोच्च न्यायालय द्वारा यथास्थिति बहाल रखने के निर्देश के चलते भारत इस समझौते से पीछे हट गया था।
भारत द्वारा पासपोर्ट मुद्रण का प्रस्ताव दिए जाने से पहले फ्रांस की कंपनी ओवरथर टेक्नोलॉजीस ने बोली जीती थी। भारत द्वारा सौदा रद्द करने के बाद भी इसी कंपनी ने नई बोली जीती।
भारत को इस सौदे से दूर करने के लिए नेपाल में विरोधियों ने मीडिया में भी अभियान छेड़ रखा था, नेपाली मीडिया के एक वर्ग का कहना था कि भारत नेपाली पासपोर्ट पर ऐसी माइक्रो चिप लगाने जा रहा है जिससे पासपोर्ट धारकों का पीछा किया जा सकता है इसे नेपाल की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया था।
जबकि सच्चाई यह थी कि भारत और नेपाल की सरकार के स्तर पर समझौता होने के कारण कमीशनखोरी के लिए सौदे में कोई जगह नहीं बची थी, समझौते के तहत भारतीय कंपनी को नेपाल को खाली पासपोर्ट बुकलेट उपलब्ध कराने थे और नेपाल में एक कार्यालय स्थापित करके नेपाली कर्मचारियों को प्रशिक्षित करना था।
नेपाल में भारत के राजदूत राकेश सूद ने कहा कि भारत में नेपाली पासपोर्ट धारकों को विशेषाधिकार दिए गए हैं, ऐसे में नेपाली पासपोर्ट का दुरुपयोग भारत के लिए एक बड़ी सुरक्षा चिंता है।
नेपाली नागरिकों को भारत आने के लिए न तो पासपोर्ट और न ही वीजा की जरूरत होती है। उन्हें वर्क परमिट की जरूरत नहीं होती। नेपाली लोग यहां शेयर खरीद सकते हैं, संपत्ति खरीद सकते हैं और व्यापार कर सकते हैं।
पिछले एक साल में आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े करीब 20 ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया है जिन्होंने अपनी गतिविधियां चलाने के लिए भारत-नेपाल सीमा का उपयोग किया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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