बॉयलर क्षेत्र में चीन से प्रतिस्पर्धा कर सकता है भारत
चेन्नई, 6 जुलाई (आईएएनएस)। युआन की विनिमय दर डॉलर और अन्य मुद्राओं के सापेक्ष यदि स्वतंत्र तरीके से तय हो तो भारतीय बॉयलर निर्माता चीनी कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं।
देश की अधिकांश विद्युत परियोजनाएं चीन के उपकरणों के सहारे संचालित हो रहीं हैं क्योंकि वे सस्ती हैं।
जीबी इंजीनियरिंग इंटरप्राइजेज के प्रबंध निदेशक जी.पट्टाभिरमन ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि चीनी कंपनियों की तुलना में भारतीय निर्माताओं की कीमत करीब 15 प्रतिशत अधिक है। चीनी मुद्रा की कीमत यदि डॉलर की तुलना में स्वतंत्र तरीके से तय हो तो यह अंतर खत्म हो जाएगा।
चीन के अधिकांश व्यापारिक साझेदार युआन-डॉलर की स्वनिर्धारित दर पर आपत्ति करते हैं। उनका कहना है कि युआन की दर कृत्रित तरीके से कम तय की गई है, इससे चीन के निर्यातों को लाभ मिलता है। कमजोर युआन से चीन की वस्तुएं सस्ती हो जाती हैं।
पट्टाभिरमन ने कहा कि देश 20 से 200 टन भाप प्रतिघंटा पैदा करने वाले मध्यम आकार के बॉयलरों का केंद्र बन सकता है।
तमिलनाडु बॉयलर एसोसिएशन द्वारा 17-19 सितम्बर 2010 को आयोजित होन वाले मेले बॉयलर 2010 के अध्यक्ष पट्टाभिरमन ने कहा कि देश का बॉयलर उद्योग अपनी सीमाएं बढ़ा रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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