क्रांतिकारी गीतों, नारों के साथ आजाद का अंतिम संस्कार (लीड-1)

हैदराबाद, 4 जुलाई (आईएएनएस)। शीर्ष नक्सली नेता चेरुकुरी राजकुमार उर्फ आजाद का रविवार को यहां अंतिम संस्कार कर दिया गया। पूर्व नक्सलियों, उनसे सहानुभूति रखने वालों और नागरिक अधिकार संगठनों के कार्यकर्ताओं ने क्रांतिकारी गीतों, नारों और लाल सलाम के साथ आजाद को अंतिम विदाई दी।

शुक्रवार को आदिलाबाद जिले में कथित पुलिस मुठभेड़ में मारे गए आजाद के शव को रविवार सुबह को मधापुर स्थित उसके भाई के आवास पर लाया गया।

आजाद के भाई अनिल कुमार ने क्रांतिकारी लेखक वरवरा राव और अन्य के साथ लगभग अपराह्न् दो बजे चिता को मुखाग्नि दी। इस दौरान 'लाल सलाम, लाल सलाम' और 'कामरेड आजाद अमर रहे' का नारा गूंजता रहा।

विभिन्न संगठनों के शोकाकुल लोगों ने दो घंटे से अधिक समय तक पंजागुत्ता श्मशान परिसर में शोकसभा आयोजित की, आजाद को अपनी श्रद्धांजलि दी और केंद्र व राज्य सरकार पर आजाद को फर्जी मुठभेड़ में मारने का आरोप लगाया।

शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने से पहले आजाद के रिश्तेदारों, दोस्तों और समर्थकों ने उसे श्रद्धांजलि दी। सांस्कृतिक कलाकारों और वामपंथी संगठनों के नेताओं ने भी नक्सलियों के प्रवक्ता और संगठन के शीर्ष नेताओं में से एक आजाद को श्रद्धांजलि दी।

उसकी मां चेरुकुरी करुणा, भाई चेरुकुरी सुरेश और अन्य रिश्तेदार तथा क्रांतिकारी लेखक वरवरा राव, कल्याण राव तथा बलादीर गदर भी इस मौके पर मौजूद थे।

महिलाओं से सहित कई अन्य व्यक्तियों ने भी अंतिम संस्कार स्थल पर आजाद को श्रद्धांजलि दी। गदर सहित कलाकारों ने क्रांतिकारी गीत गाए। उन्होंने आजाद को "जनता का सच्चा नेता बताया, जिसने गरीबों और दबे कुचलों के लिए अपने को कुर्बान कर दिया। "

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्‍सवादी-लेनिनवादी) जनशक्ति के पूर्व नेता अमर, भाकपा (माले) के अन्य नेता, मडिगा समुदाय के नेता मांडा कृष्णा मडिगा और प्रोग्रेसिव आर्गनाइजेशन ऑफ वूमेन की नेता संध्या ने आजाद को श्रद्धांजलि दी।

नक्सलियों और आंध्र प्रदेश सरकार के बीच वर्ष 2005 में शांति वार्ता में मध्यस्थता करने वाले वरवर राव, गदर और कल्याण राव ने उपस्थित जन समूह को संबोधित किया।

वरवरा राव ने आरोप लगाया कि आंध्र प्रदेश पुलिस ने आजाद को एक पत्रकार के साथ नागपुर में गिरफ्तार किया, उसे आदिलाबाद जिले में लाया और प्रताड़ित किया, फिर नजदीक से उसे गोली मार दी।

राव ने कहा, "आजाद स्वामी अग्निवेश से प्राप्त शांति का एक संदेश लेकर जा रहा था और वह शांति वार्ता की तैयारी में जुटा हुआ था। ऐसे व्यक्ति की फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर सरकार ने साबित कर दिया है कि शांति में उसकी रुचि नहीं है।"

आजाद के साथ अपने गहरे जुड़ाव को याद करते हुए राव ने कहा कि उसने गरीबों के हितों की लड़ाई लड़ने के लिए अपने अच्छे कॅरियर को तिलांजलि दे दी थी। उन्होंने कहा, "वह दबे कुचलों की आवाज था और एक महान बुद्धिजीवी था। अंग्रेजी और तेलुगू दोनों भाषाओं पर उसका समान अधिकार था।"

गदर ने कहा कि फर्जी मुठभेड़ में आजाद को मार कर सरकार जन आंदोलन को दबा नहीं सकती। उन्होंने कहा, "यह एक असंवैधानिक सरकार है, क्योंकि संविधान और लोकतंत्र के नाम पर यह जनता की हत्या कर रही है। मैं हत्यारों को चेतावनी देता हूं कि यदि उन्होंने इस तरह की हत्याएं जारी रखी तो उन्हें विशाल जनांदोलन का सामना करना होगा।"

दूसरी ओर नक्सली नेता किशनजी ने रविवार को कहा कि आजाद की हत्या के विरोध में बुधवार से पूरे देश में दो दिवसीय बंद रखा जाएगा।

कथित पुलिस मुठभेड़ में आजाद के मारे जाने की निंदा करते हुए कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी ने पश्चिम बंगाल में एक अज्ञात स्थान से आईएएनएस से कहा कि संगठन ने दो दिवसीय भारत बंद का फैसला किया है।

किशनजी ने कहा कि दूध, सब्जी, दवा, एंबुलैंस, रेलवे और दमकल जैसी आपात सेवाओं को बंद से मुक्त रखा जाएगा।

भाकपा-माओवादी की सैन्य शाखा पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) के प्रमुख का आरोप है कि पार्टी के प्रवक्ता आजाद और उनके सहयोगी पुलिस मुठभेड़ का शिकार नहीं हुए, बल्कि उनको गिरफ्तार करने के बाद मारा गया।

उन्होंने कहा, "आजाद को एक अन्य नक्सली सुकदेब के साथ नागपुर से पकड़ा गया और वहां से 150 किलोमीटर दूर आदिलाबाद ले जाकर मार दिया गया।"

किशनजी के अनुसार पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक में हिस्सा लेने के लिए आजाद दंडकारण्य जा रहे थे तभी पुलिस ने उनको पकड़ लिया।

किशनजी ने कहा कि नक्सलियों से वार्ता के बारे में केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदंबरम की स्वामी अग्निवेश से हुई बातचीत पर चर्चा के लिए आजाद पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक में हिस्सा लेने वाले थे।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, चिदंबरम और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के.रोसैया की आलोचना करते हुए किशनजी ने कहा कि यह स्पष्ट है कि केंद्र वार्ता नहीं करना चाहता क्योंकि एक ओर वह वार्ता की बात करता है और दूसरी ओर हमारे सदस्यों की हत्या कर रहा है।

उन्होंने कहा कि आजाद की हत्या के साथ ही पोलित ब्यूरो के 13 सदस्यों में से छह या तो मारे जा चुके हैं या सलाखों के पीछे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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