जम्मू एवं कश्मीर : तनाव के बावजूद 'हर हर महादेव' की गूंज (राउंडअप)
श्रीनगर/जम्मू, 1 जुलाई (आईएएनएस)। कर्फ्यूग्रस्त कश्मीर घाटी में तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद गुरुवार को हर हर महादेव की गूंज में कोई कमी नहीं आई। भारी सुरक्षा के बीच लगभग 15,000 तीर्थयात्रियों ने पवित्र अमरनाथ यात्रा आरंभ कर दी। इस दौरान तीर्थयात्रियों में खासा उत्साह देखा गया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "बालतल से 7,000 से अधिक तीर्थयात्रियों ने 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित अमरनाथ गुफा तक पहुंचने के लिए सुबह आठ बजे से यात्रा आरंभ कर दी। इसके अलावा 1,100 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था मणिगाम से बालतल के लिए रवाना हो गया है। "
अधिकारी ने कहा, "सभी तीर्थयात्री सुरक्षित हैं। बालतल, मणिगाम और अन्य स्थानों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।"
दूसरी ओर 8,000 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था पहलगाम के नुनवान शिविर से चंदनवाड़ी के लिए रवाना हुआ। इस यात्रा के दौरान चार पड़ावों में पहलगाम, पहला पड़ाव है।
हरियाणा से आए हरि प्रसाद (49) ने कहा, " जब हम पवित्र गुफा पहुंचेंगे तो कश्मीर और देश के अन्य हिस्सों में शाति के लिए प्रार्थना करेंगे।"
तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए हैं। इसकी वजह घाटी में बीते कुछ दिनों से व्याप्त तनाव है। हाल ही में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों में झड़प के दौरान कुछ लोग मारे गए थे। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के लगभग 3,000 जवान अनंतनाग पहंच चुके हैं।
गौरतलब है कि अमरनाथ यात्रा लगभग दो महीने तक चलेगी। यात्रा का समापन 25 अगस्त होगा। इस यात्रा के लिए अब तक 1.5 लाख लोगों ने पंजीकरण करवाया है।
उधर, श्रीनगर और कश्मीर घाटी के उत्तरी और दक्षिणी शहरों में कर्फ्यू की सीमा बढ़ा दी गई। इसकी वजह से इन इलाकों में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त रहा।
राज्य में हाल में हुई हिंसा की घटनाओं के विरोध में अलगाववादियों द्वारा विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। अलगाववादियों ने शुक्रवार को श्रीनगर के ईदगाह मैदान में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है।
गाड़ियों पर लाउडस्पीकरों के जरिए श्रीनगर और घाटी के अन्य इलाकों में कफ्यू की सीमा बढ़ाए जाने की यह घोषणा की गई।
उत्तरी कश्मीर के सोपोर शहर में कर्फ्यू लगातार छठे दिन और दक्षिण के अनंतनाग, कुलगाम और पुलवामा में लगातार दूसरे दिन जारी रहा। हालांकि प्रशासन इस दौरान लगाए गए प्रतिबंधों को कर्फ्यू का नाम देने से इंकार कर रहा है। गुरुवार को श्रीनगर के सात थाना क्षेत्रों में कड़े प्रतिबंध जारी रहे।
एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, "पुराने शहर के कुछ हिस्सों में कर्फ्यू लगाया गया है लेकिन हम नागरिकों को कहीं आने-जाने से रोक नहीं रहे हैं। ऐहतियाती प्रतिबंध शरारती और असामाजिक तत्वों के लिए की गई है।"
रैनावाड़ी, नौहाटा, एम.आर. गंज, साफा कदल, सौरा और परिमपोरा थाना क्षेत्रों में प्रतिबंध लगाए गए हैं।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि हालात तुलनात्मक रूप से कुछ बेहतर हैं। श्रीनगर के ऊपरी इलाकों में निजी यातायात सामान्य है और पुराने शहरों में लोग खरीददारी कर रहे हैं।
श्रीनगर जिले के पुलिस प्रमुख आशिक हुसैन बुखारी ने कहा, "हालात पर नजर रखी जा रही है और बिना वजह प्रतिबंध, एक मिनट से भी ज्यादा देर नहीं रहेंगे।"
अनंतनाग में सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी में तीन किशोरों की मौत हो जाने के बाद भड़की जबरदस्त हिंसा के बाद अनंतनाग शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया था।
पिछले एक सप्ताह में सुरक्षा बलों की कथित गोलीबारी में आठ युवकों की मौत हो चुकी है।
इस बीच, श्रीअमरनाथ यात्रा संघर्ष समिति ने कश्मीर घाटी में अमरनाथ श्रद्धालुओं को कथित तौर पर प्रताड़ित किए जाने के विरोध में शनिवार को जम्मू बंद का आह्वान किया है।
समिति ने वर्ष 2008 में अमरनाथ श्राइन बोर्ड विवाद पर दो महीने का आंदोलन चलाया था। समिति का कहना है कि श्रद्धालुओं के साथ हो रही कथित प्रताड़ना के मद्देनजर बंद का आह्वान किया गया है।
सुरक्षा बलों पर हो रही पत्थरबाजी के पीछे पाकिस्तान के आतंकवादियों का हाथ होने का दावा करते हुए समिति ने कहा कि बंद आयोजित करने की एक वजह यह भी है।
समिति के प्रतिनिधि सुचेत सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, "जम्मू में गुरुवार देर शाम हुई एक बैठक में हमने यह फैसला लिया है। घाटी में बढ़ती भारत विरोध भावनाओं को देखते हुए यह बंद बुलाया जाना आवश्यक हो गया था।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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