टोल टैक्स के लिए देश भर में डिजिटल सिस्टम लगाए जाएंगे
यह तंत्र रेडियो तरंगों के जरिए संचालित होगा इस तंत्र के मई 2012 तक शुरू होने की उम्मीद है। इस तंत्र में आरएफआईडी यानि रेडियों तरंगों से पहचान की तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
सड़क एवं परिवहन मंत्री कमलनाथ ने कहा, "आरएफआईडी से कश्मीर से कन्याकुमारी तक लोग बिना रुके यात्रा कर पाएंगे। इस समय सरकार को टोल टैक्स में 15 प्रतिशत यानि प्रतिवर्ष 300 करोड़ रुपये का नुकसान होता है।"
इस कार्य के लिए सरकार ने इंफोसिस के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी और विशेष पहचान प्राधिकरण के अध्यक्ष नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है।
कमलनाथ ने कहा, "इस काम के लिए ऐसी तकनीक की खोज करने की चुनौती थी जो पूरी तरह आधुनिक, उपयोग में आसान और अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।"
इस काम के लिए एक सौ रुपये की कीमत का आरएफआईडी कार्ड सभी वाहनों पर लगाया जाएगा जबकि इस कार्ड को पड़ने के लिए टोल बूथों पर दो लाख रुपये की कीमत का टैग रीडर लगाया जाएगा।
वाहन मालिक यात्रा शुरू करने से पहले इस कार्ड को रिचार्ज करके बिना रुके यात्रा कर सकेंगे।
देश में करीब 71,000 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग हैं लेकिन केवल 8,500 किलोमीटर के इलाके में ही टोल टैक्स एकत्रित किया जाता है। सरकार टोल टैक्स के इलाके में 30 हजार किलोमीटर की बढ़ोतरी करना चाहती है।
नीलेकणि ने कहा कि इस तंत्र के जरिए वाहनों की पहचान करने में भी मदद मिलेगी और चोरी के वाहनों को तुरंत पकड़ा जा सकेगा।
फिलहाल यह तकनीक अमेरिका, मेक्सिको, चिली, अर्जेटीना और दुबई में उपयोग की जा रही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications