मार्च महीने से ही लापता था नक्सली नेता आजाद
प्रतिबंधित भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के पोलित ब्यूरो का सदस्य आजाद 12 मार्च को लापता हो गया था। नक्सली संगठन ने आरोप लगाया था कि आंध्र प्रदेश पुलिस के विशेष जांच ब्यूरो ने आजाद को अगवा कर लिया है। इसके साथ ही नक्सलियों ने धमकी दी थी कि यदि सुरक्षा बलों ने आजाद को किसी तरह का नुकसान पहुंचाया तो उन्हें उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
उस दौरान नक्सलियों ने चिंता व्यक्त की थी कि आजाद को फर्जी मुठभेड़ में मारा जा सकता है। लेकिन बाद में नक्सलियों ने 21 मार्च को एक दूसरा बयान जारी कर अाजाद को सुरक्षित बताया था।
लेकिन दंडकारण्य विशेष जोन कमेटी के प्रवक्ता गुडसा उसेंदी ने भाकपा (माओ) के केंद्रीय नेतृत्व को सूचित किया था कि आजाद का अता-पता नहीं है।
उसके बारे में यह चर्चा थी कि वह 12 मार्च को महाराष्ट्र में कहीं शकमुरी अप्पाराव से मिलने वाला था। लेकिन अप्पाराव और अन्य नक्सली नेता कोंडल रेड्डी को आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले में उसी दिन मार डाला गया था।
नक्सलियों को संदेह था कि पुलिस ने अप्पाराव के साथ ही आजाद को भी अगवा कर लिया था और उसे अवैध रूप से हिरासत में रखे हुए था। भ्रम की स्थिति इसलिए बनी हुई थी, क्योंकि आजाद एक सप्ताह तक शीर्ष नेताओं से संपर्क नहीं कर सका था और 17 मार्च को दंडकारण्य में वह अपने अड्डे पर नहीं पहुंच सका था।
आजाद की मां चेरुकुरी करुणा ने भी आंध्र प्रदेश राज्य मानवाधिकार आयोग (एसएचआरसी) में गुहार लगाई थी कि उसके बेटे को जान का खतरा है। उसने मांग की थी कि आजाद को तत्काल अदालत में पेश किया जाए।
एसएचआरसी ने आंध्र प्रदेश पुलिस के महानिदेशक आर.आर.गिरीश कुमार को निर्देश दिया था कि वह आयोग को इस मामले में एक रिपोर्ट सौंपें। गिरीश कुमार ने आयोग को सूचित किया था कि आजाद पुलिस हिरासत में नहीं है।
अब पुलिस ने दावा किया है कि आजाद को शुक्रवार तड़के तीन बजे आदिलाबाद जिले में जोगापुर के पास जंगल में एक मुठभेड़ में मार गिराया गया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications