भारत से अमेरिकी कंपिनयों का रक्षा सौदा तय करने में जुटा पेंटागन
वाशिंगटन, 2 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिकी रक्षा विभाग-पेंटागन, अपने देश की कंपनियों को भारतीय वायुसेना के लिए 126 लड़ाकू विमानों के 10 अरब डॉलर के सौदे और भविष्य में सी-7 मालवाहक विमान की बिक्री दिलाने की कोशिशों में जुटा है।
अमेरिकी रक्षा विभाग इस सौदे को महज वाणिज्यिक लेन-देन ही नहीं बल्कि भारत-अमेरिकी भागीदारी में वृद्धि के नजरिए से भी महत्वपूर्ण मानता है।
अमेरिका की सहायक रक्षा मंत्री मिशेल फ्लोरनॉय ने एशिया सोसाइटी के सदस्यों से कहा, "मैं हमेशा से भारतीय रक्षा सेनाओं को अमेरिकी सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर देती रही हूं और भविष्य में भी ऐसा करूंगी। अमेरिकी कंपनियां भारत के साथ काम करने के लिए उत्सुक हैं क्योंकि भारतीय सेना का आधुनिकीकरण हो रहा है।"
अमेरिकी कंपनियों बोइंग और लॉकहीड मार्टिन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा, "हम रक्षा सौदों के लिए भविष्य में सी-17 विमानों की बिक्री के बारे में भी विचार कर रहे हैं।"
फ्लोरनॉय ने कहा, "रक्षा क्षेत्र में व्यापार को हम आर्थिक नजरिए की बजाए रणनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण मान रहे हैं हालांकि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को होने वाले आर्थिक लाभ से इंकार नहीं किया जा सकता।"
फ्लोरनॉय ने कहा, "ये रक्षा सौदे भारत और अमेरिका के सामूहिक रक्षा हितों की सुरक्षा के लिए दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग के नजरिए से काफी महत्वपूर्ण हैं।"
फ्लोरनॉय ने कहा, "भारत अपने लिए स्वयं का रक्षा उद्योग विकसित करने का प्रयास कर रहा है और इसके लिए वह सभी तरह की बेहतर तकनीकें तलाश रहा है।"
उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत को आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने के लिए संकल्पबद्ध है और पिछले साल हमने इस जरूरत को पूरा करने के लिए लाइसेंस की कई मांगों को मंजूर किया है।
फ्लोरनॉय ने अमेरिका रक्षा मंत्री राबर्ट एम. गेट्स के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिकी निर्यात सुधारों को प्राथमिकता के क्षेत्र में रखा जाएगा। अमेरिका के निर्यात नियंत्रणों के चलते देश के मजबूत साझेदार तलाशने में मुश्किल पैदा होती है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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