लाहौर में आत्मघाती हमला, 43 की मौत (लीड-4)
लाहौर, 2 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के लाहौर में 'हजरत दाता गंज बक्श' की दरगाह में गुरुवार देर रात हुए दो आत्मघाती विस्फोटों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 43 हो गई है। इस घटना में 175 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं।
वेबसाइट 'द न्यूज डॉट कॉम' के अनुसार विस्फोटों में मरने वालों की संख्या 43 हो गई है। अब तक 28 शवों की शिनाख्त हो चुकी है। पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री शाहबाज शरीफ ने हमले में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों के लिए पांच लाख पाकिस्तानी रुपये और प्रत्येक घायल को 75,000 पाकिस्तानी रुपये का मुआवजा देने का एलान किया है।
अधिकारियों ने बताया कि दो आत्मघाती हमलावरों ने दरगाह परिसर में दो जगहों पर विस्फोट कर दिया। दोनों ने अपने शरीर से 20 किलोग्राम से अधिक विस्फोटक बांध रखे थे। यह दरगाह 11वीं सदी के सूफी संत अबुल हसन अली हाजवेरी की है। उन्हें आमतौर पर दाता गंज बक्श के नाम से जाना जाता है।
पहले आत्मघाती हमलावर ने अपने आप को दरगाह के बेसमेंट में गरुवार रात लगभग 10.46 बजे अपने आप को उड़ा लिया। दूसरा विस्फोट दो मिनट बाद उस समय हुआ जब दूसरे हमलवार ने दरगाह के अहाते में दाखिल होने के बाद खुद को विस्फोट से उड़ा दिया। पुलिस के अनुसार हमलावरों की उम्र 20-22 के बीच थी। दरबार के वजूखाने के निकट एक बम बरामद किया गया। आत्मघाती हमले के बाद घटना स्थल पर लोगों के शव इधर-उधर बिखरे हुए थे।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि उन्हें दो विस्फोटों की आवाज सुनाई दी और फिर चारों ओर धूआं फैल गया। मौके पर मौजूद एक व्यक्ति ने बताया, "मैंने देखा कि दरगाह के चारो ओर से धुंआ उठ रहा था। पूरे इलाके में जलने की बू फैल गई थी।"
घटना के समय मौके दरगाह में मौजूद एक जायरीन ने बताया,"विस्फोट के बाद पुरुष, महिलाएं और बच्चे चारों तरफ भाग रहे थे। सभी चीख-चिल्ला रहे थे। पूरा बेसमेंट मलबे में तब्दील हो गया।"
दरगाह के प्रभारी मियां साजिद अहमद ने बताया हमले से संबंधित धमकियां पहले से मिल रही थीं। सुरक्षा के पार्याप्त इंतजाम न होने की वजह से यह हादसा हुआ। बम निरोधक दस्ते के अधिकारियों ने शवों के नमूनों को फोरेंसिक जांच के लिए इक्कठा किया। पुलिस ने इलाके को चारों तरफ से घेर लिया है। पुलिस ने हमलावरों के शव को बरामद कर लिए हैं।
हमले की जानकारी देते हुए लाहौर के पुलिस आयुक्त खुसरो परवेज ने कहा, "यह हमला एक बड़ी साजिश का नतीजा है। हमारे लोग ही दूसरों के हाथों के हथियार बन रहे हैं।"
विस्फोटों के तत्काल बाद ही दुकानदारों ने दुकाने बंद कर लीं। उल्लेखनीय है कि मई में लाहौर स्थित अहमदिया समुदाय की दो मस्जिदों में हुए हमले में 80 से अधिक लोग मारे गए थे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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