कश्मीर में सुरक्षा बलों के प्रति कांग्रेस व भाजपा की सहानुभूति (राउंडअप)

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने आईएएनएस से कहा, "जम्मू एवं कश्मीर हो या अन्य आतंक प्रभावित राज्य, सुरक्षा बल के जवान प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करते हैं लेकिन द्विपक्षीय नुकसान से बचने के लिए उन्हें अतिरिक्त प्रयास करने चाहिए।"

भाजपा ने सुरक्षा बलों का बचाव किया। भाजपा ने कहा कि सुरक्षा बल के लोग राष्ट्र की रखवाली का अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।

भाजपा प्रवक्ता तरुण विजय ने कहा, "भाजपा सीआरपीएफ (केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल) के साथ है। वे राष्ट्र की रखवाली कर रहे हैं। वे लोगों की सुरक्षा के लिए काम करते हैं। सुरक्षा बल संविधान के लिए और राज्य में निर्वाचित सरकार के लिए काम कर रहे हैं।"

इसके एक दिन पहले भाजपा ने कहा था कि वह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही राज्य में नागरिकों की मौत पर टिप्पणी करेगी।

इस बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के उप महासचिव सुधाकर रेड्डी ने कहा कि उनकी पार्टी कश्मीर में जिस तरीके से हिंसा फैल रही है, उससे वाकई में दुखी है।

रेड्डी ने कहा, "भाकपा और वामपंथी पार्टियों की ओर से हम घाटी में शांति बहाली की अपील करते हैं।"

उधर जम्मू एवं कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी (जेकेएनपीपी) ने उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली भ्रष्ट और अलोकतांत्रिक जम्मू एवं कश्मीर सरकार को बर्खास्त करने तथा राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है।

पार्टी प्रमुख भीम सिंह ने आईएएनएस से कहा, "सोपोर, बारामूला और कश्मीर के अन्य हिस्सों में जारी विरोध प्रदर्शन न तो भारत के खिलाफ है और सुरक्षा बलों के ही। यह वर्तमान भ्रष्ट और अलोकतांत्रिक सरकार के खिलाफ नाराजगी का प्रदर्शन है।"

लेकिन मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने इस बात से इंकार किया है कि विरोध प्रदर्शन स्वाभाविक तौर पर या 'सरकार से लोगों की नाराजगी' के कारण हो रहा है।

उन्होंने कहा, "यह लड़ाई विवेक, विचारधाराओं की है, जिसमें विभिन्न देश, विरोधी तत्व और बुरी नीयत वाले कुछ लोग शामिल होकर समस्या पैदा कर कर रहे हैं।"

जम्मू एवं कश्मीर में जारी हिंसा को कानून व व्यवस्था का मामला मानने से इंकार करते हुए मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने जनता से प्रदेश में कानून-व्यवस्था बहाल करने में मदद की अपील की। उन्होंने कहा कि कश्मीर घाटी में हिंसा से कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है।

गुपकार रोड स्थित अपने आवास पर आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में अब्दुल्ला ने कहा कि घाटी में स्थिति और न बिगड़ने पाए, इसके लिए सभी को मिलकर प्रयास करना होगा और इसमें राजनीतिक पार्टियों, सामाजिक संगठनों तथा मीडिया, सभी की भूमिका है।

उन्होंने कहा कि लोगों की नाराजगी समझी जा सकती है, लेकिन उसका दुरुपयोग करने की कोशिश की जा रही, जो ठीक नहीं है।

उन्होंने युवाओं से सुरक्षा बलों पर पथराव न करने की अपील की और बुजर्गो से उनको समझाने का भी आग्रह किया।

अब्दुल्ला ने पिछले 15 दिनों के भीतर 11 नागरिकों की हत्या से लोगों में उभरे आक्रोश के मद्देनजर मंगलवार को जनता से शांति बहाली की भावनात्मक अपील की।

घाटी के दक्षिण इलाके में फैली हिंसा के बाद कई इलाकों में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान तीन लोगों की हत्या की ताजा घटना के बाद अब्दुल्ला ने कहा, "मैं हाथ जोड़कर सभी अभिभावकों से अपील करता हूं कि वे अपने बच्चों को समझाएं, आश्वस्त करें कि उन्हें बाहर नहीं निकलने देंगे और सुरक्षा बलों पर पत्थरबाजी करने से रोकेंगे।"

उल्लेखनीय है कि बार-बार भड़क रही हिंसा को देखते हुए सरकार ने घाटी के दक्षिणी, उत्तरी और केंद्रीय संभागों में कर्फ्यू का आदेश दिया है।

अब्दुल्ला ने कहा कि कर्फ्यू का उल्लंघन करने वालों के साथ सख्ती से निपटा जाएगा।

अब्दुल्ला ने संवाददाताओं से कहा, "घाटी के विभिन्न क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू किया जा रहा है। उत्तरी कश्मीर के कुछ इलाके भी कर्फ्यू की चपेट में हैं। दक्षिणी कश्मीर में स्थिति के बिगड़ने के साथ ही जरूरत के मुताबिक विभिन्न इलाकों में कर्फ्यू लागू किया जाएगा।"

अब्दुल्ला ने कहा, "सुरक्षा बलों से अधिकतम संयम बरतने के लिए कहा गया है। उन्हें स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए कर्फ्यू लागू करना पड़ेगा।"

उन्होंने कहा, "हमारा एक कर्तव्य है। हम कम से कम समय में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।" अब्दुल्ला ने कर्फ्यूग्रस्त इलाके के लोगों से अपील की कि वे सरकार को सहयोग करें और सुरक्षा बलों के साथ न उलझें।

अब्दुल्ला ने कहा, "जहां कर्फ्यू घोषित किया गया है, वहां कर्फ्यू को पूरी तरह लागू किया जाएगा।"

केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने उमर अब्दुल्ला के रुख का समर्थन किया है।

चिदंबरम ने मंगलवार को कहा कि केंद्र सरकार, जम्मू एवं कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा राज्य में हिंसा को समाप्त करने के प्रयासों का समर्थन करेगी।

चिदंबरम ने कहा कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को निर्देश दिया गया है कि दंगाइयों से निपटने के दौरान अधिकतम संयम बरता जाए। लेकिन इसके साथ ही चिदंबरम ने कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को आत्मरक्षार्थ बल प्रयोग करना पड़ा था।

चिदंबरम ने कहा कि 25 जून से लेकर अब तक सोपोर और बारामूला में सीआरपीएफ के 53 जवान घायल हुए हैं। इसलिए लोगों को समझना चाहिए कि सुरक्षा बलों के सामने किस तरह की चुनौती है।

हिंसा पर खेद प्रकट करते हुए चिदंबरम ने कहा, "मैं खासतौर से इस बात से दुखी हूं कि जानें गई हैं।"

चिदंबरम ने मुख्यमंत्री अब्दुल्ला द्वारा श्रीनगर में संवाददाता सम्मेलन में बोले गए हर शब्द का समर्थन किया।

चिदंबरम ने कहा, "मैं मुख्यमंत्री द्वारा लोगों से कानून का आदर करने के लिए की गई अपील के साथ हूं। मैं खासतौर से अभिभावकों से अपील करूंगा कि वे कर्फ्यू के दौरान अपने बच्चों को घरों में रखें।"

चिदंबरम ने आगे कहा, "केंद्र सरकार कर्फ्यू के उल्लंघन, पथराव और दंगे के अंत के लिए कश्मीर सरकार के प्रयासों का समर्थन करेगी।"

चिदंबरम ने कहा कि विश्वस्त सूत्रों से खबर मिली है कि राष्ट्रविरोधी ताकतें वहां हालात का नाजायज फायदा उठाने की कोशिश कर रही हैं।

उधर, जम्मू एवं कश्मीर के उत्तरी भाग में मोबाइल फोन सेवाएं सुरक्षा कारणों से लगातार दूसरे दिन भी (मंगलवार) बाधित रहीं।

मोबाइल सेवाएं सोपोर, बारामूला, बांदीपोरा, पट्टन और कुपवाड़ा में बंद की गई है। एक मोबाइल सेवा प्रदाता ने कहा, "हमें अगले आदेश तक मोबाइल सेवाएं बंद रखने के लिए कहा गया है।"

कश्मीर घाटी में अधिकारियों ने एसएमएस समाचार सेवाओं को बंद कर दिया है। अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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