'हथियार छीनने के लिए सीआरपीएफ पर हमला कर रहे नक्सली'
नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के पूर्व महानिदेशक ई.एन.राममोहन ने बुधवार को कहा है कि हथियारों की आपूर्ति ठप्प हो जाने के बाद छत्तीसगढ़ के नक्सलियों ने पिछले तीन महीनों के दौरान अर्ध सैनिक बलों पर श्रृंखलाबद्ध हमले किए हैं। प्रारंभिक तौर पर ये हमले हथियार छीनने के लिए किए गए हैं।
ज्ञात हो कि एक दिन पहले, मंगलवार को नक्सलियों द्वारा छत्तीसगढ़ के अशांत बस्तर क्षेत्र में किए गए हमले में सीआरपीएफ के 26 जवान शहीद हो गए थे।
राममोहन ने आईएएनएस को बताया, "वे हथियार चाहते हैं। दंतेवाड़ा हमले की जांच के दौरान मैंने नई दिल्ली और रायपुर में पुलिस अधिकारियों से कहा था कि नक्सली और हमले कर सकते हैं।"
राममोहन ने कहा कि मंगलवार के हमले का प्राथमिक कारण सुरक्षा बलों से हथियार छीनना था।
राममोहन ने कहा, "इसके पहले नक्सलियों की आंध्र प्रदेश इकाई को लिट्टे (लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) से कुछ एके-47 राइफलें प्राप्त हुई थीं। इनमें से कुछ राइफलें छत्तीसगढ़ के नक्सलियों के पास हो सकती हैं। उन्हें नेपाली माओवादियों से कुछ हथगोले भी प्राप्त हुए थे। लेकिन अब उनके ये सभी स्रोत लगता है बंद हो चुके हैं। इसी कारण वे हथियारों के लिए सुरक्षा बलों पर हमले कर रहे हैं।"
राममोहन ने कहा कि मध्य भारत के नक्सलियों का मामला एक खास किस्म का है।
राममोहन ने कहा, "कश्मीरी आतंकियों को पाकिस्तान से हथियार मिलते हैं, पूर्वोत्तर के आतंकी चीन और बांग्लादेश से हथियार हासिल करते हैं। लेकिन नक्सलियों के पास हथियारों का कोई अंतर्राष्ट्रीय सूत्र नहीं है, लिहाजा हथियारों को हासिल करने के लिए उन्हें सुरक्षा बलों पर हमला करना पड़ता है।"
ज्ञात हो कि मंगलवार के हमले में सीआरपीएफ के 24 जवानों और एक सहायक कमांडेंट सहित 26 सुरक्षा कर्मी शहीद हो गए थे और लगभग एक दर्जन सुरक्षा कर्मी घायल हो गए थे।
पिछले तीन महीनों के भीतर इस क्षेत्र में नक्सलियों का यह चौथा बड़ा हमला था। अब तक के सबसे बड़े नक्सली हमले में नक्सलियों ने छह अप्रैल को दंतेवाड़ा में सीआरपीएफ के 75 जवानों और राज्य पुलिस के एक सिपाही को मार डाला था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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