'कश्मीर मुद्दा हल होने तक भारत से व्यापार बंद रखे पाक'
दैनिक का तर्क है कि भारी व्यापारिक घाटा पाकिस्तान के शत्रु को मदद कर रहा है, वह भी उस शत्रु को जो कश्मीरियों का दमन कर रहा है और अखण्ड भारत का नारा बुलंद कर रहा है।
संपादकीय में उस व्यापार माफिया की जांच कराने की मांग भी की गई है, जो कि परवेज मुशर्रफ के शासनकाल से ही खुद को समृद्ध कर रहा है।
उर्दू दैनिक 'नवा-ए-वक्त' में 'भारत से तिजारत क्यों?' शीर्षक वाले संपादकीय में कहा गया है, "भारत, पाकिस्तान का धुर शत्रु है। भारत ने दिल से पाकिस्तान के उदय को कभी स्वीकार नहीं किया है। क्या यही कारण तो नहीं है, जिसके कारण विभाजन का एजेंडा अभी तक अधूरा है? कश्मीर घाटी सभी अंतर्राष्ट्रीय कानूनों और नियमों के अनुसार पाकिस्तान का एक हिस्सा है, लेकिन भारत इस पर जबरन कब्जा किए हुए है।"
संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि भारत के आठ लाख सशस्त्र बल कश्मीर के बेगुनाह लोगों के दमन के लिए नए रास्ते तलाश रहे हैं। संपादकीय में आगे कहा गया है, "संयुक्त राष्ट्र के विभिन्न प्रस्तावों में कश्मीर के लोगों के लिए आत्मनिर्णय के अधिकार की बात कही गई है, लेकिन मुद्दे के समाधान के रास्ते में भारत बड़ा रोड़ा बना हुआ है।"
संपादकीय में आरोप लगाया गया है कि भारत कश्मीर मुद्दे के हल के लिए तैयार नहीं है। संपादकीय में लिखा गया है कि भारत द्वारा कश्मीर को एक अभिन्न हिस्सा बताना इस बात को प्रदर्शित किया है कि वह अभी भी 'अखण्ड भारत' का सपना संजोए हुए है।
संपादकीय में आगे लिखा गया है, "यदि कश्मीर मुद्दे के बावजूद पाकिस्तान भारत के साथ व्यापार जारी रखता है तो इससे अखण्ड भारत के एजेंडे को बढ़ावा मिलेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications