बागवानी दे जीवन की शिक्षा

हाल में किए गए एक शोध से पता चलता है कि बागवानी में भाग लेने से बच्चे खुशी महसूस करते हैं और उनके विकास में निखार आता है.
रायल हॉर्टीकल्चर सोसाइटी की ओर से शुरू किए गए इस शोध में 1,300 अध्यापक और 10 स्कूल शामिल किए गए.
यह पाया गया कि जिन स्कूली बच्चों को बागवानी के लिए प्रोत्साहित किया गया, उनमें अधिक फुर्ती और आत्मविश्वास पाया गया. इन बच्चों का सेहत कहीं अधिक बेहतर था.
रायल हार्टीकल्चर सोसाइटी का कहना है कि बागवानी को पढ़ाई-लिखाई की अन्य गतिविधियों के रूप में अपनाए जाने के बजाए स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए.
शोध का संचालन नेशनल फाउंडेशन फॉर एजुकेशन रिसर्च के शोधार्थियों ने किया. शोधार्थियों ने पाया कि जिन अध्यापकों ने बच्चों को सिखाने में बागवानी का इस्तेमाल किया, उन बच्चों में सीखने की प्रक्रिया अधिक तेज रही.
प्रतिभा में निखार
इस पद्धति को अपनाने से बच्चों को समस्याओं के समाधान में अधिक सक्रिय होने में मदद मिलती है. साथ ही, उनके गणितीय कौशल में भी इज़ाफ़ा होता है.
रिपोर्ट में कहा गया, "मौसम से लेकर पौधों की बीमारियों आदि की जानकारी से बच्चों में खुद ही समस्याओं के समाधान का कौशल विकसित हुआ. बच्चों को कीड़े-मकोड़ों से परिचित कराने पर उनमें डर ख़त्म करने में मदद मिली. वहीं, फसल तैयार होने के लिए इंतजार करने से धैर्य की भावना पैदा हुई. उनमें नई सब्जियां पैदा करने की चाहत भी जागी."
रायल हार्टीकल्चर सोसाइटी में साइंस एंड लर्निंग के डायरेक्टर डॉ साइमन थोर्नटॉन वुड ने कहा कि शोध से साबित होता है कि बागवानी की मदद लेकर पढ़ाने से पढ़ाना रचनात्मक हो जाता है और इसके नतीजे अधिक प्रभावी होते हैं.
उनका कहना है कि ऐसे बच्चे अपने वयस्क जीवन की चुनौतियों के लिए अधिक तैयार होते हैं.












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