मूल्य वृद्धि के खिलाफ देश भर में प्रदर्शन (राउंडअप)
केंद्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार की प्रमुख सहयोगी तृणमूल कांग्रेस ने जहां मूल्य वृद्धि वापस लिए जाने की मांग की वहीं समूचा विपक्ष इस मसले पर एक बार फिर एकजुट होता दिख रहा है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के संयोजक शरद यादव ने मूल्य वृद्धि के खिलाफ भारत बंद का आह्वान करते हुए सभी राजनीतिक दलों से इसमें शामिल होने की अपील की।
भाजपा ने राजधानी दिल्ली सहित देश भर के जिला मुख्यालयों पर मूल्य वृद्धि के खिलाफ प्रदर्शन किया वहीं वामदलों ने पश्चिम बंगाल में हड़ताल और केरल में बंद का आयोजन किया।
उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) ने तो उड़ीसा में बीजू जनता दल (बीजद) ने प्रदर्शन किया। आंध्र प्रदेश में तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के और तमिलनाडु में ऑल इंडिया अन्नाद्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के कार्यकर्ता मूल्य वृद्धि के खिलाफ सड़कों पर उतरे।
उत्तर प्रदेश में भाजपा और सपा कार्यकर्ताओं ने कीमतों में वृद्धि के खिलाफ प्रधानमंत्री के पुतले जलाए। प्रदर्शन कर रहे प्रमुख भाजपा नेताओं को लखनऊ में गिरफ्तार कर लिया गया। दिल्ली में भी भाजपा और वामदलों ने अलग-अलग प्रदर्शन किए। विपक्षी दलों ने कहा है कि केंद्र सरकार को आम आदमी की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता वी.के मल्होत्रा और दिल्ली इकाई के प्रमुख विजेंद्र गुप्ता के नेतृत्व में भाजपा कार्यकर्ताओं ने आईटीओ पर विरोध प्रदर्शन किया।
दिल्ली में जंतर-मंतर पर वामपंथी पार्टियों के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया, उन्होंने केंद्र सरकार से बढ़ी हुई कीमतें वापस लेने की मांग की।
वामपंथी पार्टियों के शासन वाले राज्य पश्चिम बंगाल में हड़ताल के कारण जन-जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। यहां बस, टैक्सी और ऑटोरिक्शा वालों की हड़ताल के चलते लोगों को यातायात के लिए भारी परेशानी झेलनी पड़ी। यहां मार्क्सवादी पार्टी से संबंद्ध श्रमिक संगठन सीटू ने हड़ताल आयोजित की थी।
केरल में भी सत्ताधारी गठबंधन वामपंथी लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) द्वारा आयोजित बंद के चलते ज्यादातर दुकानें बंद रहीं और यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप्प हो गई।
उड़ीसा में सत्तारूढ़ पार्टी बीजद के कार्यकर्ताओं ने सरकार के फैसले को आम जनता पर बोझ बताते हुए इसके खिलाफ विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किया।
बीजद के विधायकों ने विधानसभा में भी इस फैसले का विरोध किया, पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भुवनेश्वर में इस बढ़ोतरी के खिलाफ रैली निकाली।
केंद्र सरकार पर आम आदमी के साथ धोखा देने का आरोप लगाते हुए जनता दल (युनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने भारत बंद के लिए विपक्षी पार्टियों से एकजुट होने का आान किया।
यादव ने मीडियाकर्मियों से शनिवार को यहां कहा कि वह विभिन्न राजनीतिक पार्टियों से बातचीत कर बंद की तारीख तय करेंगे।
यादव ने कहा, "विपक्षी पार्टियों को अपने मतभेद भुलाकर भारत बंद के लिए एक तारीख तय करनी चाहिए।"
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर बढ़ती कीमतों को रोक पाने में विफल होने का आरोप लगाते हुए यादव ने कहा कि पिछले छह वर्षो की उनकी मुख्य उपलब्धि भारत-अमेरिका परमाणु समझौता भर है।
यादव ने कहा, "खाद्य कीमतों में हर रोज हो रही वृद्धि से लोगों का जीना कठिन हो गया है। लेकिन संप्रग (संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन) सरकार राष्ट्रमंडल खेलों के बंदोबस्त में व्यस्त है। ऐसे में जब देश की आम जनता का जीना ही मुश्किल हो गया है, तो इस आडंबर प्रदर्शन का क्या मतलब?"
भाजपा महासचिव धर्मेद्र प्रधान ने पत्रकारों से कहा, "मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी भविष्य में महंगाई कम होने का बयान देने के बजाय हमें यह बताएं कि महंगाई कब कम होगी।"
रेल मंत्री ममता बनर्जी ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि मूल्य वृद्धि से वह खुद भी परेशान हैं और वह केंद्र सरकार से अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह करेंगी।
मूल्य वृद्धि के केंद्र सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कांग्रेस ने कहा कि यह निर्णय खास मजबूरी में ही उठाया गया है, क्योंकि कोई भी सरकार जनता के बीच अपनी फजीहत नहीं कराना चाहेगी।
कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने कहा, "निश्चितरूप से खास मजबूरियां रही होंगी। कोई भी सरकार बदनाम होना नहीं चाहती।" लेकिन द्विवेदी ने उस मजबूरी को नहीं बताया, जिसने सरकार को पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि के लिए मजबूर किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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