ईंधन कीमतों में वृद्धि लोगों पर आघात: वामदल
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लॉक (एआईएफबी), रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) ने अपने संयुक्त बयान में कहा, "सरकार इस बढ़ोतरी को सही साबित करने के लिए गलत जानकारियां दे रही है।"
ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी को तुरंत वापस लेने की मांग करते हुए वाम दलों ने कहा कि वे इस वृद्धि का देश व्यापी विरोध करेंगे।
बयान में कहा गया, "डीजल और केरोसीन की कीमतों में बढ़ोतरी से किसान और गरीब बुरी तरह प्रभावित होंगे। रसोई गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से मध्य वर्ग पर बोझ और बढ़ेगा। कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार ने अपना कठोर और आम आदमी विरोधी चरित्र दिखा दिया है।"
केंद्रीय बजट में पेट्रोल के दाम में तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए बयान में कहा गया है, "इस दौरान अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है और न ही सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थो पर करों में कोई कमी की है, पेट्रोलियम पदार्थो की कीमतों में एक बड़ा हिस्सा सरकार द्वारा लगाए जा रहे करों का है।"
माकपा के महासचिव प्रकाश करात, भाकपा महासचिव ए. बी. वर्धन, फार्वर्ड ब्लॉक के देवव्रत विश्वास और आरएसपी के टी. जे. चंद्रचूडन ने कहा, "सरकार का यह कठोर निर्णय ऐसे समय में आया है जब खाद्य पदार्थों की महंगाई दर 17 प्रतिशत के करीब है और कुल महंगाई दर दोहरे अंकों में पहुंच गई है। इस समय दुनिया में सबसे ज्यादा महंगाई भारत में है।"
वाम दलों ने सरकार के इस तर्क को भी मिथक बताया है कि इस कदम से सरकारी क्षेत्र की कंपनियों का घाटा कम होगा।
बयान में कहा गया, "यह तथाकथित घाटा वास्तविक लागत मूल्य के बजाय राष्ट्रीय कीमत आंकलन के आधार पर दिखाया जा रहा है। वास्तविक रूप से यह विनियंत्रण केवल निजी कंपनियों की मदद करने के लिए किया जा रहा है जो कि सरकारी कीमत नियंत्रण के चलते तेल विपणन बाजार से बाहर हो गई थीं। अब ये कंपनियां बाजार में दोबारा प्रवेश करके मुनाफा कमाने के लिए आजाद हैं।"
उन्होंने कहा, "पेट्रोल की कीमतों को नियंत्रण मुक्त करके सरकार ने इसकी कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का रास्ता साफ किया है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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