भारत-पाक वार्ता शुरू, आतंकवाद और कश्मीर केंद्रबिंदु (लीड-1)
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विदेश सचिव निरुपमा राव पाकिस्तान के विदेश सचिव सलमान बशीर के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत कर रही हैं। मुंबई आतंकी हमले के बाद द्विपक्षीय वार्ता की बहाली के लिए विश्वास कायम करने की संभावनाएं तलाशने की दिशा में किया गया यह पहला प्रयास होगा। दोनों पक्षों के बीच आतंकवाद, जम्मू एवं कश्मीर विवाद और विश्वास कायम करने के कदमों पर चर्चा होगी।
नवंबर 2008 को पाकिस्तान से आए 10 आतंकवादियों ने 60घंटे तक कहर बरपाया था। इस हमले में 166 लोग मारे गए थे जिनमें विदेशी भी शामिल थे।
राव और बशीर की इस बैठक से इस्लामाबाद में गत 15 जुलाई को होने वाली विदेश मंत्री एस.एम. कृष्णा और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी की बैठक का आधार तैयार होगा।
वार्ता के दौरान भारत, पाकिस्तान पर दबाव बनाएगा कि वह अपनी धरती पर रची जाने वाली भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों की साजिशों पर रोक के लिए कदम उठाए।
शिष्टमंडल स्तरीय विचार-विमर्श के दौरान, भारत 26/11 के आतंकी हमले के सात संदिग्धों के खिलाफ पाकिस्तान में शीघ्र मुकदमे, इन हमलों के षड्यंत्रकारी हाफिज सईद और भारत विरोधी एजेंडे को हवा दे रहे पाकिस्तानी गुटों के खिलाफ ठोस कार्रवाई किए जाने पर जोर देगा।
राव सीमा पार घुसपैठ तथा संघर्षविराम की घटनाओं में हाल ही में हुई वृद्धि का मसला भी उठा सकती हैं। भारत विश्वास कायम करने के उपाय तलाशने के लिए इस वार्ता में शिरकत करने जा रहा है जिससे दोनों देशों में व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की बहाली का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।
भारत बंदियों पर बनी न्यायिक समिति की जल्द बैठक बुलाने, व्यापक वाणिज्यिक एवं आर्थिक संबंधों तथा सीमा पार व्यापार के लिए कदम उठाने के लिए जैसे उपायों के लिए पाकिस्तान पर दबाव बना सकता है।
नई दिल्ली की ओर से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि वह वार्ता में संभावनाएं तलाशने की मंशा से जा रहा है और उसका रुख दोषारोपण का नहीं है।
इससे पहले बुधवार को विदेश मंत्री एस. एम कृष्णा ने कहा, "हम इस वार्ता से कुछ बहुत बड़ी कामयाबी की उम्मीद नहीं कर रहे हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध बहुत पेंचीदा हैं। इस वार्ता का मकसद मेरी इस्लामाबाद यात्रा से पहले की तैयारी करना है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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