नक्सली चुनौती का सहज समाधान नहीं : बुद्धदेब
भट्टाचार्य ने स्वीकार किया कि नक्सलियों द्वारा राज्य के कई हिस्सों में जारी हत्या और आतंक ने एक बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। भट्टाचार्य ने कहा कि सरकार इस चुनौती से राजनीतिक और प्रशासनिक कार्रवाइयों के जरिए निपट रही है।
भट्टाचार्य ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के मुख पत्र 'गणशक्ति' के साथ एक साक्षात्कार में कहा, "मुख्य विपक्षी पार्टी, कुछ संगठन और कुछ लोग नक्सलियों को प्रत्यक्ष और परोक्ष प्रोत्साहन मुहैया करा रहे हैं। इसके कारण यह समस्या और जटिल हो गई है।"
भट्टाचार्य ने जोर देकर कहा कि नक्सली मुद्दा मुख्य रूप से एक राजनीतिक समस्या है और इससे राजनीतिक रूप से ही निपटा जा सकता है।
भट्टाचार्य ने कहा कि इस समस्या को राष्ट्रीय संदर्भ में देखा जाना चाहिए, क्योंकि नक्सली सात से आठ राज्यों में सक्रिय हैं।
वाम मोर्चा सरकार की 33वीं वर्षगांठ के मौके पर भट्टाचार्य ने कहा, "चूंकि नक्सलियों ने दूरवर्ती और समाज के गरीब वर्ग की आबादी वाले इलाके को चुना है, इसलिए हमें उन्हें अलग-थलग करने के लिए सामाजिक आर्थिक कार्यक्रमों को शुरू करना होगा। दूसरी ओर हमें पुलिस और प्रशासन को सक्रिय करना होगा और उनके साथ राजनीतिक रूप से भी लड़ना होगा।"
भट्टाचार्य ने कहा कि उनकी सरकार नक्सलियों का मुकाबला करने के लिए सभी मोर्चो पर काम कर रही है। "लेकिन यह एक लंबी लड़ाई है। इसका सहज समाधान नहीं निकलने वाला।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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