पाकिस्तान को अमरीका की चेतावनी

अमरीका के विशेष दूत रिचर्ड हॉलब्रूक ने पाकिस्तान को सावधान किया है कि वह ईरान की गैस पाइपलाइन परियोजना पर कोई वादा न करे क्योंकि ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका और प्रतिबंध लगाने वाला है.
पाकिस्तान की यात्रा कर रहे श्री हॉलब्रूक ने कहा कि पाकिस्तान को तब तक इंतज़ार करना चाहिए जब तक नए अमरीकी क़ानून का ब्योरा न आ जाए.
अमरीकी संसद में एक विधेयक की तैयारी हो रही है जिससे ईरान पर और प्रतिबंध लगाए जाएंगे.
रिचर्ड हॉलब्रूक ने कहा कि पाकिस्तान को गैस पाइप लाइन के वादे से सावधान रहना चाहिए क्योंकि इन अमरीकी प्रतिबंधों से पाकिस्तानी कम्पनियां प्रभावित हो सकती हैं.
श्री हॉलब्रूक ने कहा, “पाकिस्तान में बिजली की भारी समस्या है और हम इसे समझते हैं लेकिन इस परियोजना के संबंध में एक विधेयक तैयार हो रहा है जो इस परियोजना पर भी लागू हो सकता है. हम पाकिस्तान को सावधान करना चाहते हैं कि जब तक उसे इस विधेयक की जानकारी न मिल जाए कोई वादा न करे”.
गैस पाइप लाइन समझौता
कुछ दिन पहले ही ईरान ने पाकिस्तान के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये थे जिसके अधीन वह 2014 से पाकिस्तान को प्रतिदिन 21.5 क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस की सप्लाई शुरु करेगा.
पहले योजना थी कि ये गैस पाइपलाइन ईरान से पाकिस्तान होती हुई भारत तक जाएगी लेकिन भारत गैस के दामों और पारगमन शुल्क को लेकर पैदा हुए मतभेदों के कारण इससे अलग हो गया. कुछ का मानना है कि भारत ने अमरीका के दबाव में आकर ऐसा किया.
अमरीका दुनिया के विभिन्न देशों को ईरान के साथ व्यापारिक संबंध बनाने के लिए हतोत्साह करता रहा है क्योंकि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ना नहीं चाहता और उसने यूरेनियम संवर्द्धन बंद करने से इंकार कर दिया है.
अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र के साथ मिलकर ईरान के विरुद्ध चार तरह के प्रतिबंध लगाए हैं और उन कम्पनियों और लोगों को भी निशाना बनाया है जो कथित तौर पर ईरान की उसके परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल कार्यक्रम में मदद कर रहे हैं.
इस समय अमरीकी संसद ईरान के पैट्रोलियम उद्योग को निशाना बनाने के लिए और प्रतिबंधों पर तैयारी कर रही है.
ऊर्जा संकट
पाकिस्तान में बिजली की भारी कमी है जिसके ख़िलाफ़ कई जनप्रदर्शन हो चुके हैं.
पाकिस्तान का कहना है कि उसे बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए गैस की सख़्त ज़रूरत है.
अमरीका मानता है कि पाकिस्तान गंभीर ऊर्जा संकट से गुज़र रहा है. उसने आश्वासन दिया है कि पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र को विकसित करना उसकी पहली प्राथमिकता है.
हालांकि अमरीका ने पाकिस्तान ईरान गैस पाइपलाइन समझौते का विरोध किया है लेकिन उसे अल क़ायदा और तालिबान के ख़िलाफ़ चल रही लड़ाई में पाकिस्तान के सहयोग की भी ज़रूरत है.












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