नीतीश ने लौटाई सहायता राशि, गठबंधन में तल्खी (राउंडअप)

पटना स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी ने आईएएनएस को बताया कि बिहार सरकार ने गुजरात को सहायता राशि लौटा दी है। इस राशि का इस्तेमाल नहीं किया गया था।

राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री दीवेश चंद ठाकुर ने कहा कि गुजरात की ओर से बाढ़ पीड़ितों के लिए दी गई मदद का ढिंढोरा पीटे जाने की वजह से राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है।

जनता दल (युनाइटेड) के प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने भी एक समाचार चैनल से बातचीत में इस बात की पुष्टि की। उन्होंने कहा, "एक एजेंडे के तहत हमारा नुकसान किया गया है। हमारी वजह से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मुस्लिम मत मिले। बिहार में हमारी वजह से ही भाजपा है।"

ज्ञात हो कि पिछले दिनों पटना में भाजपा कार्यसमिति की बैठक के दौरान स्थानीय अखबारों में एक विज्ञापन छपा था जिसमें नीतीश कुमार और मोदी की तस्वीर एक साथ छपी थी। एक अन्य विज्ञापन में इस बात का जिक्र था कि वर्ष 2008 में कोसी बाढ़ आपदा के समय गुजरात ने बिहार को पांच करोड़ रुपये की मदद की थी।

उसी दिन नीतीश ने गुजरात को पैसा लौटाने की धमकी दी थी। विज्ञापन से नाराज नीतीश ने भाजपा नेताओं को दिया जाने वाला रात्रिभोज तक रद्द कर दिया था।

भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा, "राहत में राजनीति नहीं होनी चाहिए। राशि न लौटाई जाती तो अच्छा होता। इसकी कोई आवश्यकता नहीं थी।"

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य पुरुषोत्तम रूपाला ने अहमदाबाद में कहा, "नीतीश जो चाहें करें हम उनके कहने पर नहीं चलने वाले हैं। कोसी बाढ़ आपदा के दौरान मैं खुद दो ट्रेन राहत व खाद्य सामग्री लेकर बिहार गया था। क्या नीतीश उसे भी वापस लौटाएंगे। भाजपा बिहार में नीतीश के पीछे नहीं चलने वाली है। हमने गठबंधन धर्म निभाया है और आगे भी निभाते रहेंगे। उनकी जो इच्छा हो वह करें।"

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सिद्धार्थ पटेल ने अहमदाबाद में कहा, "मोदी की प्रसिद्धि की भूख के कारण गुजरात के गौरव और अस्मिता का अपमान हुआ है। यदि मोदी सरकारी खर्चे पर विज्ञापन न छपवाते तो इस अपमान से बचा जा सकता था। उन्होंने नीतीश को गुजरात का अपमान करने का मौका दे दिया।"

हालांकि भाजपा प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने लखनऊ में कहा कि बिहार में राजग गठबंधन को कोई खतरा नहीं है। सब कुछ ठीक है। इसी प्रकार जद(यू) अध्यक्ष शरद यादव ने कहा कि कुछ परिस्थियां उत्पन्न हुई थी लेकिन इसका गठबंधन पर कोई असर नहीं होगा।

दरअसल, मोदी अब पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के बाद खुद को बतौर पार्टी का नेता घोषित करने की कोशिश में जुट गए हैं। इसी रणनीति के तहत पटना में राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के पहले से ही होर्डिंगों, बैनरों व पोस्टरों में छाए रहने के बाद मोदी ने गत शनिवार को विज्ञापनों का सहारा लिया था।

गुजरात में रह रहे बिहार के लोगों की ओर से जारी एक विज्ञापन के जरिए वह खुद को बिहार की जनता के साथ भावनात्मक रूप से जोड़ने की कोशिश करते देखे गए थे। कार्यसमिति की बैठक के पहले दिन यानी शनिवार को पटना से प्रकाशित होने वाले लगभग सभी अखबारों में एक पूरे पृष्ठ का विज्ञापन छपा था, जिसमें लिखा था कि गुजरात और बिहार का बहुत पुराना संबंध रहा है।

यही नहीं, इस विज्ञापन के जरिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के विकास मॉडल पर मोदी के मॉडल को भारी पड़ते दिखाया गया था। विज्ञापन में कहा गया था, "संकट की घड़ी में गुजरात हमेशा बिहार के साथ खड़ा रहा है। कोसी नदी में 2008 में आई बाढ़ के दौरान भी गुजरात ने बिहार को सर्वाधिक मदद दी।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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