भाजपा-जद (यू) के बीच चौड़ी होती खाई से गठबंधन को खतरा (राउंडअप)
पटना/नई दिल्ली, 20 जून (आईएएनएस)। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच की दरार रविवार को उस समय चौड़ी हो गई, जब उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने ग्रामीण पटना में विश्वास यात्रा का बहिष्कार कर दिया। और इस तरह भाजपा ने नीतीश कुमार को एक कड़ा संदेश दिया।
इसके प्रतिक्रियास्वरूप नीतीश कुमार ने रविवार शाम आयोजित इस यात्रा को रद्द कर दिया। इस मार्च में वह मोदी के साथ हिस्सा लेने वाले थे।
राज्य के मंत्री और भाजपा नेता एन.के.यादव ने भी मुख्यमंत्री की विश्वास यात्रा से अपने को अलग कर लिया। यादव पटना सिटी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।
ज्ञात हो कि कुमार इन दिनों प्रदेश भर में विश्वास यात्रा निकाल रहे हैं और सरकार की उपलब्धियों का बखान कर रहे हैं। मोदी लगभग उनकी हर यात्रा में साथ रहा करते थे। लेकिन रविवार को जब नीतीश विश्वास यात्रा पर ग्रामीण पटना के लिए निकल रहे थे तो मोदी नहीं पहुंचे।
मोदी के एक करीबी नेता ने आईएएनएस को बताया, "नीतीश के प्रति भाजपा नेताओं में बढ़ते असंतोष के मद्देनजर मोदी ने शनिवार रात ही तय कर लिया था कि वह विश्वास यात्रा में शामिल नहीं होंगे।"
मोदी के इस रुख को प्रदेश की भाजपा और जनता दल (युनाइटेड) की गठबंधन सरकार के बीच रिश्तों में बढ़ती खटास के रूप में देखा जा रहा है।
ज्ञात हो कि पिछले दिनों पटना में भाजपा कार्यसमिति की बैठक के दौरान स्थानीय अखबारों में एक विज्ञापन छपा था, जिसमें नीतीश कुमार और मोदी की तस्वीर एक साथ छपी थी। एक अन्य विज्ञापन में इस बात का जिक्र था कि वर्ष 2008 में कोसी बाढ़ आपदा के समय गुजरात ने बिहार को पांच करोड़ रुपये की मदद की थी।
उसी दिन इन विज्ञापनों पर नीतीश ने सार्वजनिक तौर पर अपना गुस्सा प्रकट किया और विज्ञापन को बिहार की अस्मिता से जोड़ते हुए गुजरात को पैसा लौटाने की धमकी दी थी। विज्ञापन से नाराज नीतीश ने भाजपा नेताओं को दिया जाने वाला रात्रिभोज तक रद्द कर दिया था। इसके बाद गत शनिवार को नीतीश ने गुजरात सरकार को पांच करोड़ की सहायता राशि लौटा दी।
भाजपा के वरिष्ठ नेता व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कलराज मिश्र ने भी पांच करोड़ रुपये की सहायता राशि लौटाए जाने के लिए नीतीश कुमार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि नीतीश को इस फैसले पुनíवचार करना चाहिए।
कलराज ने रविवार को नई दिल्ली में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा, "नीतीश द्वारा राहत राशि लौटाना उनकी तुच्छ और संकीर्ण राजनीतिक नजरिए को दर्शाता है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्हें अपनी गलती स्वीकारते हुए अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।"
मिश्र ने कहा कि गुजरात सरकार ने बाढ़ राहत के लिए जो सहायता राशि दी थी वह नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत संपदा नहीं थी, बल्कि गुजरात की जनता की तरफ से संवेदनशीलता से युक्त मदद थी।
उन्होंने कहा, "गुजरात की जनता ने कोई कर्ज नहीं दिया था जो उसे वापस किया जाए। लौटाया कर्ज जाता है मदद नहीं। नीतीश ने बिहार ही नहीं पूरे देश की जनता की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है। वह अपनी गलती स्वीकार करें।"
मिश्र ने कहा, "अगर उन्हें मुसलमानों को इतना ही प्रसन्न करना है तो भोपाल गैस त्रासदी पर क्यों आवाज नहीं उठा रहे..क्यों वह इसे मुद्दा नहीं बनाते। इस त्रासदी में 25 हजार लोग मारे गए थे जिसमें 70 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदाय के लोग थे।"
नीतीश के ताजा कदम से भाजपा-जनता दल (युनाइटेड) के गठबंधन टूट के कगार पर पहुंच सकता है..इस सवाल पर मिश्र ने कहा, "फिलहाल हमारा गठबंधन तोड़ने का कोई इरादा नहीं है। मैं इतना जरूर कहूंगा कि नीतीश का यह कदम गठबंधन के लिए ठीक नहीं है। जनता के बीच इसका नकरात्मक संदेश जाएगा।"
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भाजपा-जद (यू) गठबंधन की मजबूती और बेहतरी के लिए नीतीश अपने फैसले पर दोबारा विचार करें।
दूसरी ओर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा गुजरात सरकार की ओर से दी गई सहायता राशि लौटाए जाने को बिहार के स्वाभिमान से जोड़ते हुए उनकी सराहना की है।
भाकपा के उपमहासचिव एस. सुधाकर रेड्डी ने कहा कि नीतीश कुमार और उनकी जद (यू) के लिए भाजपा से राष्ट्रीय स्तर पर अलग होने का उचित समय आ गया है।
उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "नीतीश और जद (यू) के भाजपा के साम्प्रदायिक एजेंडे में कुछ भी सामान्य नहीं है। वह और उनकी पार्टी धर्मनिरपेक्षता और विकास के लिए हमेशा खड़ी रहती है। उनके लिए भाजपा से अलग होने की सबसे उत्तम घड़ी यही है।"
उन्होंने कहा कि सत्ता की मौकापरस्ती के लिए भाजपा और जद (यू) एक हुए थे। "यदि नीतीश भाजपा से नाता तोड़ते हैं तो यह राज्य के विकास के लिए तो अच्छा होगा ही, धर्मनिरपेक्ष ताकतों को भी इससे मजबूती मिलेगी।"
लेकिन यहीं पर बिहार के सहकारिता मंत्री गिरिराज सिंह ने रविवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 'एहसानफरामोश' करार देते हुए उन पर गठबंधन धर्म का पालन न करने का आरोप लगाया है।
भाजपा की प्रदेश इकाई के कई नेताओं में नीतीश को लेकर जबरदस्त नाराजगी देखी जा रही है और उनकी यह नाराजगी अब धीरे-धीरे मुखर भी होने लगी है।
गिरिराज सिंह ने एक समाचार चैनल से बातचीत में कहा, "नीतीश एहसानफरामोश हैं। उन्होंने गठबंधन धर्म का पालन नहीं किया।"
उन्होंने कहा, "नीतीश ने पिछले साढ़े चार साल के दौरान एक भी सरकारी फैसले में भाजपा नेताओं से राय नहीं मांगी। अब पानी सिर से ऊपर आ गया है।"
ज्ञात हो कि पहली बार भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति के दौरान जब यह विवाद पैदा हुआ था तब भी गिरिराज सिंह ने नीतीश को आड़े हाथों लिया था।
उन्होंने कहा था, "नीतीश पिछले डेढ़ दशक से हमारे साथ हैं लेकिन अब उन्हें नरेंद्र माोदी से क्यों परहेज होने लगा। न नीतीश हमारी मजबूरी है और न ही सत्ता। हमारी मजबूरी प्रदेश की नौ करोड़ जनता है, जिन्हें हमने लालू प्रसाद के कुशासन से मुक्ति दिलाई थी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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