सबसे कम मजदूरी पाते हैं बांग्लादेश के मजदूर

वियना स्थित अंतरराष्ट्रीय व्यापार संगठन (आईटीयूसी) ने अपने ग्लोबल सर्वे की रिपोर्ट को शनिवार को जारी करते हुए कहा, 'नाममात्र मजदूरी और काम करने की बहुत ही खराब स्थिति के साथ ही फैक्ट्री मालिकों द्वारा मजदूरी एग्रीमेंट की अनदेखी बांग्लादेश में लगातार हो रहे हिंसा को बढ़ावा दे रहे हैं।'

रिपोर्ट में कहा गया कि व्यपारिक संगठनों के नहीं होने से समस्या और जटिल होती जा रही है।

समाचार पत्र 'न्यू एज' के अनुसार शनिवार को जामनगर, नरसिंहपुर और ढाका के असुलिया में मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर निकाली गई रैली की पुलिस से भिड़ंत हो गई जिसमें लगभग 100 लोग हताहत हुए और दस फैक्ट्रियों सहित पंद्रह गाड़ियों को नुकसान पहुंचा।

सर्वे में बताया गया, 2009 में भी मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर की गई हड़ताल और रैली पर पुलिस द्वारा किए गए हमले में छह मजदूरों की मौत हो गई थी।

सर्वे में बताया गया है कि सरकार ने पिछले साल इस मामले पर ध्यान देते हुए सुधार का वादा किया था। लेकिन निर्यात के माध्यम से सबसे अधिक कमाई (साल 2009 में 12 बिलियन डॉलर की कमाई) करने वाले इस उद्योग के हालात में अभी भी कोई सुधार नहीं हुआ है।

बांग्लादेश में यह उद्योग पूरी तरह से निजी हाथों में है जहां विदेशी पैसा भी लगा हुआ है। इस उद्योग में लगभग 30 लाख कामगार काम करते हैं जिनमें ज्यादातर औरतें हैं।

2007-08 में बांग्लादेश में इमरजेंसी लगा दी गई। आईटीयूसी ने कहा, 'इमरजेंसी हटने के बाद वस्त्र उद्योग में काम करने वाले मजदूरों को उम्मीद बंधी लेकिन अभी भी वहां कोई सुधार नहीं हुआ।'

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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