नक्सलियों के नियंत्रण में हीरा भंडार
पैलीखण्ड (छत्तीसगढ़), 20 जून (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ के दूरवर्ती जंगली इलाकों में नक्सलियों का राज है। इस इलाके में एक ऐसा इलाका है, जहां जमीन के नीचे हीरे का भंडार है। इस इलाके को नक्सलियों ने अपने कब्जे में ले लिया है। राज्य सरकार ने यहां स्थित एक पुलिस चौकी को पिछली जुलाई में हटा दिया था।
राजधानी रायपुर से कोई 150 किलोमीटर दूर स्थित पैलीखण्ड गांव में 18 एकड़ में फैले हीरे का यह क्षेत्र उड़ीसा की सीमा पर स्थित है और यहां उच्च श्रेणी के हीरे का भंडार है।
राज्य खुफिया ब्यूरो (एसआईबी) के एक अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, "पैलीखण्ड में हीरे के इलाके को अब नक्सलियों के भरोसे छोड़ दिया गया है। जुलाई 2009 में पुलिस चौकी के हटाए जाने के बाद से ही नक्सलियों ने वहां अपना अड्डा जमा लिया है और स्थिति यहां तक पहुंच चुकी है कि कोई भी पुलिस कर्मी इलाके में गश्त पर जाने का साहस नहीं कर पाता।"
राज्य सरकार ने वर्ष 2000 में एक निजी कंपनी, बी विजयकुमार छत्तीसगढ़ एक्सप्लोरेशन प्राइवेट लिमिटेड को पुर्वेक्षण लाइसेंस प्रदान किया था, लेकिन एक वर्ष बाद लाइसेंस रद्द कर दिया गया। उस इलाके को बाड़ से घेर दिया गया और वहां सुरक्षा कर्मियों को तैनात कर दिया गया था।
उसके बाद कंपनी ने लाइसेंस रद्द करने के राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। कंपनी की ओर से इस बात की पुष्टि की गई है कि पैलीखण्ड में उच्च श्रेणी के हीरे का भंडार है।
कई सारी ताजा खुफिया सूचनाओं का जिक्र करते हुए अधिकारी ने कहा, "पूरा मैनपुर इलाका, जिसमें पैलीखण्ड भी आता है, इस समय खतरनाक बन गया है। नक्सलियों ने इस पूरे इलाके के जंगली मार्गो पर विस्फोटक लगा रखा है।"
खुफिया अधिकारी ने कहा, "क्षेत्र की स्थिति बहुत नाजुक है। हम केंद्र सरकार से कह रहे है कि स्थिति हाथ से निकल जाए, इसके पहले मैनपुर-गरियाबंद-देवभोग इलाके में केंद्रीय अर्धसैन्य बल की एक बटालियन तैनात कर दी जाए।"
रायपुर के पुलिस अधीक्षक दीपांशु काबरा ने पुष्टि की है कि पैलीखण्ड में फिलहाल कोई सुरक्षा कर्मी तैनात नहीं है, क्योंकि कई कारणों से सुरक्षाकर्मियों को पिछले वर्ष जुलाई महीने में वापस बुला लिया गया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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