गैस त्रासदी : मंत्री समूह ने की पर्यावरण मुद्दों पर चर्चा (लीड-1)

मंत्री समूह की रविवार की बैठक में पर्यावरण संबंधी मुद्दों पर चर्चा की गई। भोपाल गैस त्रासदी पर शुक्रवार से शुरू हुई बैठक का यह चौथा सत्र था।

बैठक के बाद नार्थ ब्लाक कार्यालय में पी. चिदंबरम ने संवाददाताओं से कहा, "आज मंत्री समूह की चौथे सत्र की बैठक हुई। बैठक दो घंटे चली। इसमें पर्यावरण संबंधी मुद्दे और इससे बचाव के उपायों पर चर्चा की गई। "

उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान संक्रमित मिट्टी, संक्रमित जल, दुर्घटनास्थल के पास विषैला कचरा और निष्क्रिय संयंत्र पर चर्चा की गई। हालांकि उन्होंेने इसका विस्तृत विवरण देने से इंकार कर दिया।

दो-तीन दिसंबर 1984 को भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड संयंत्र से तकरीबन 40 टन मिथाइल आइसोसायनाइट गैस रिसी थी जिससे तीन हजार लोगों की उसी रात मौत हो गई थी और इस हादसे में करीब 20, 000 लोगों की मौत हो गई थी।

हादसे के 25 साल बाद भी संयंत्र में कई टन विषैला रासायनिक कचरा मौजूद है जो भूजल को संक्रमित करने के साथ ही भोपाल के निवासियों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बना हुआ है।

मंत्री समूह की बैठक के बारे में एक सूत्र ने आईएएनएस से कहा केंद्र सरकार की निगरानी में संयंत्र स्थल से कचरे की सफाई पर भी चर्चा की गई।

सूत्र ने कहा, "पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश ने इस संबंध में प्रस्तुतीकरण दिया। मंत्री समूह सलाह देगा कि केंद्र सरकार कचरे की सफाई में सहयोग देगी लेकिन कचरे की सफाई की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश सरकार की होनी चाहिए।"

चिदंबरम ने कहा कि मंत्री समूह की बैठक का यह आखिरी सत्र है। हमने शुरुआत में जिन मुद्दों पर चर्चा तय की थी उन सभी मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। अब इस बैठक के मिनट्स तैयार किया जाएगा। मंत्री समूह सोमवार को 10 बजे बैठक करेगा जिसमें विवरण को अंतिम रूप दिया जाएगा।

सूत्र ने कहा कि अंतिम सिफारिश के निष्कर्षो में यूनियन कार्बाइड के प्रमुख वारेन एंडरसन के प्रत्यर्पण और उसके खिलाफ भारत में मामले की सुनवाई को भी शामिल किया जा सकता है।

इसके अलावा जिन अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई उनमें औद्योगिक हादसों से निपटने के लिए न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत करना, संयंत्र स्थल की सफाई, डाउ केमिकल्स पर दायित्व दावों पर दबाव बनाने के विकल्प पर विचार आदि शामिल हैं। डाउ केमिकल्स ने ही यूनियन कार्बाइड कंपनी खरीदी है।

समूह द्वारा निकाले गए निष्कर्ष को तैयार कर सोमवार को प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा। ज्ञात हो कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 10 दिनों के भीतर मंत्री समूह को अपनी रिपोर्ट देने को कहा है।

इससे पहले मंत्री समूह की शनिवार को हुई बैठक में गैस त्रासदी से संबंधित सभी वैधानिक मुद्दों और कानूनी विकल्पों पर विचार किया गया और संभावित निष्कर्ष पर पहुंचने की कोशिश की गई थी।

मंत्री समूह ने पीड़ित परिवारों और प्रभावितों को अधिक से अधिक मुआवजा राशि देने सहित इससे जुड़े कानूनी पहलुओं, त्रासदी स्थल की सफाई से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की।

सूत्रों ने कहा कि योजना आयोग गैस पीड़ितों की सहायता के लिए प्रदेश सरकार को 982 करोड़ रुपये की राशि जारी करने पर सहमत हो गया है।

इससे पहले शुक्रवार को मंत्री समूह की पहली बैठक हुई थी जिसमें पीड़ितों के राहत व पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जीओएम को इस हादसे से जुड़े सभी पहलुओं पर 10 दिन के भीतर मंत्रिमंडल को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

वर्ष 1984 में हुए इस हादसे में लगभग 20,000 लोगों के मारे जाने का अनुमान है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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