गैस त्रासदी : कानूनी विकल्प की तलाश कर रहा जीओएम (लीड-1)
शनिवार को पहले सत्र की बैठक के बाद जीओएम के अध्यक्ष केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा, "हमने सभी बकाया मुद्दों और निचली अदालत के फैसले के बाद सरकार के पास मौजूद विकल्पों के बारे में चर्चा की। हम सभी की चिंताओं को सुनने के बाद एक संभावित निष्कर्ष पर पहुंचे हैं।" अगली बैठक शाम को होने वाली है।
अगली बैठक में जीओएम वर्ष 1984 की इस त्रासदी के कारण स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेगा।
उन्होंने कहा कि समूह के निष्कर्ष को तैयार कर सोमवार को प्रधानमंत्री को सौंपा जाएगा।
इससे पहले शुक्रवार को मंत्री समूह की पहली बैठक हुई जिसमें पीड़ितों के राहत व पुनर्वास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि जीओएम 1996 के सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले पर पुनर्विचार के लिए कानूनी विकल्प तलाश रही है जिसमें अदालत ने आरोपी के खिलाफ लगे गैर इरादतन हत्या के मामले को लापरवाही के कारण मौत में बदल दिया था।
अधिकारियों ने कहा कि यह जिम्मेदारी तय करने और यूनियन कार्बाइड के पूर्व चेयरमैन वारेन एंडरसन को भारत लाने की संभावना तलाशने का मामला है। एंडरसन इस मामले में मुख्य आरोपी है।
सूत्रों ने कहा कि योजना आयोग गैस पीड़ितों की सहायता के लिए प्रदेश सरकार को 982 करोड़ रुपये की राशि जारी करने पर सहमत हो गया है।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री और जीओएम के सदस्य पृथ्वीराज चव्हाण ने शुक्रवार को संकेत दिए थे कि जीओएम विश्व की सबसे बड़ी इस औद्योगिक त्रासदी के लिए जवाबदेही भी तय कर सकता है।
चव्हाण से पत्रकारों ने जब वार्ता के दौरान यह पूछा कि क्या इस मामले के मुख्य आरोपी को सजा नहीं होगी। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि वह इसका सीधा जवाब नहीं देंगे। सोमवार तक रोजाना होने वाले मंत्री समूह की बैठक के लिए तय एजेंडे में बहुत सारे मुद्दे हैं।
उन्होंने कहा, "मैं आपको आश्वस्त करता हूं कि त्रासदी से संबंधित सभी पहलू एजेंडे में शामिल हैं और इस पर चर्चा होगी।"
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने जीओएम को इस हादसे से जुड़े सभी पहलुओं पर 10 दिन के भीतर मंत्रिमंडल को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
वर्ष 1984 में हुए इस हादसे में लगभग 20,000 लोगों के मारे जाने का अनुमान है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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