आर्थिक पुनर्जीवन विश्व की प्रमुख चुनौती : खड़गे
खड़गे जेनेवा में अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के 99वें सत्र को संबोधित कर रहे थे। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन की आम सभा में दुनिया के 170 देश भाग ले रहे हैं, जिनमें राजनीतिक शख्सियतें, श्रम संगठन और कर्मचारी संगठन शामिल हैं।
खड़गे ने कहा कि हमारे सामने बढ़ती बेरोजगारी और गरीबी, रोजगार की कमी, सामाजिक सुरक्षा की कमी जैसे गंभीर मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि यद्यपि रोजगार सृजन का अवसर दोबारा आ गया है लेकिन अब भी वैश्विक बेरोजगारी की दर बहुत ऊंची है। उन्होंने कहा कि हम सब यह जानते हैं कि अगर रोजगार नहीं बढ़ेगा तो आर्थिक पुनर्जीवन भी नहीं हो पाएगा।
मंत्री ने कहा कि वैश्विक आर्थिक मंदी से निपटने के लिए भारत ने विस्तृत आधार वाली नीति अपनाई और मौद्रिक कड़ाई की जगह मौद्रिक सहजता को प्राथमिकता दी, ताकि आर्थिक संकट के दुष्प्रभाव को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि आर्थिक गतिविधियों को वित्त उपलब्ध करने के लिए हमने कम कीमत पर कर्ज की उपलब्धता बढ़ाई।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का उल्लेख करते हुए खड़गे ने कहा कि इसके अंतर्गत रोजगार सृजन को बढ़ावा दिया जा रहा है, और आज 52 प्रतिशत महिलाएं इस योजना से लाभ उठा रही हैं। इस योजना के तहत हर गरीब घर से एक व्यक्ति को साल में 100 दिन का रोजगार दिया जाता है। उन्होंने बताया कि भारत राष्ट्रीय रोजगार नीति बनाने की प्रक्रिया में है।
नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि इसके तहत छह से 14 वर्ष के आयुवर्ग के बच्चों को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा प्राप्त करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है। उन्होंने कहा कि इसके अलावा राष्ट्रीय कौशल विकास नीति भी है जिसका लक्ष्य 2022 तक पचास करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान करना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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