गरीब परिवारों की पहचान के लिए पायलट परियोजना शुरू होगी
नई दिल्ली, 16 जून (आईएएनएस)। ग्रामीण विकास मंत्रालय नए मानकों के अनुरूप गरीबी रेखा के नीचे (बीपीएल) के परिवारों की गणना के लिए अगले महीने से 256 गांवों में एक पायलट परियोजना शुरू करेगा। सरकार ने इन मानकों को जनगणना 2011 के लिए स्वीकार किया है।
सरकार ने बीपीएल सूची में सुधार को अपनी प्राथमिकता में रखा है ताकि वास्तविक रूप से गरीब लोगों तक सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का लाभ पहुंचाया जा सके।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के सचिव बी. के. सिन्हा ने आईएएनएस को दिए साक्षात्कार में कहा, "सरकार में उच्च स्तर के लोग इस बात को लेकर काफी बेचैन हैं कि बीपीएल सूची में सुधार का काम पूरी शुद्धता के साथ हो, अकादमियों और स्वयंसेवकों सहित हर कोई इस काम में सहयोग कर रहा है।"
सही सूची बनने पर सरकार कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक गरीबों तक पहुंचा पाएगी और सरकार की 60 हजार करोड़ रुपये की खाद्य सब्सिडी का भी सही उपयोग हो पाएगा।
सिन्हा ने कहा कि बीपीएल कार्ड के जरिए घर और राशन जैसे बहुत सारे लाभ दिए जाते हैं, लेकिन गलत लोग भी इन सब्सिडियों का फायदा उठा लेते हैं। "वास्तविक गरीब की कोई आवाज नहीं होती, बीपीएल कार्ड राजनीतिक अर्थव्यवस्था का जरिया बन गए हैं।"
पायलट परियोजना में वास्तविक गरीबों की पहचान करने के लिए विशेषज्ञों द्वारा सुझाए गए मानकों का परीक्षण किया जाएगा।
सिन्हा ने कहा कि वर्ष 2002 में हुई बीपीएल जनगणना 13 सूत्रीय विधि पर आधारित थी। पिछले काफी समय से बीपीएल सूची की आलोचना हो रही थी और 2008 में इस सूची को तैयार करने के लिए गरीबों की पहचान की सही विधि के मानक तय करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया था।
एन. सी. सक्सेना की अध्यक्षता वाली समिति ने सूची के अंतर्गत परिवारों को एक से 10 तक के ग्रेडिंग देने और इस सूची से समूहों को क्रमिक तौर पर बाहर करने और शामिल करने की सिफारिश की है।
नए मानकों में ऐसे लोग जिनके पास जिले में प्रति परिवार औसत भूमि से दोगुनी भूमि (सिंचित या आंशिक सिंचित) या दोपहिया या तीन पहिया मोटर वाहन या फिर ट्रेक्टर, थ्रेसर और हार्वेस्टर जैसे कृषि उपकरण रखने वाले परिवारों को सूची से बाहर रखने की सिफारिश की गई है।
आयकर भरने वाले परिवार और 10,000 रुपये से ज्यादा वेतन पाने वाले निजी क्षेत्रों के कर्मचारियों के परिवार और सरकारी क्षेत्र में पेंशन जैसी सुविधाएं पाने वाले कर्मचारियों को बीपीएल सूची से बाहर रखा जाएगा।
सूची में आदिम जनजातीय समूहों, ऐसे परिवार जिनमें परिवार को चलाने की जिम्मेदारी अकेली महिला पर हो, बिना घर वाले परिवार, बेसहारा परिवारों, अनुसूचित जाति में शामिल महादलितों के परिवारों को सूची में शामिल करने की सिफारिश की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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