30 करोड़ डॉलर में ख़ूनी संडे की जांच

ब्लडी संडे या ख़ूनी रविवार के नाम से प्रचलित ब्रिटेन के क़ानूनी इतिहास की सबसे पुरानी और सबसे मंहगी जांच रिपोर्ट आज जनता के सामने होगी.
इसकी जांच में बारह साल लगे हैं और तीस करोड़ डॉलर खर्च किए गए हैं.
साल 1972 में लंदनडेरी में एक नागरिक अधिकार आंदोलन के दौरान ब्रितानी सेना ने गोली चला दी थी जिसमें 13 लोग मारे गए थे और 14 घायल हुए थे.
उत्तरी आयरलैंड के आंदोलन का ये सबसे विवादास्पद दिन था और इसे ब्लडी संडे का नाम दिया गया.
ब्रिटेन की सरकार ने तब दस हफ़्तों में एक जांच रिपोर्ट प्रकाशित कर दी लेकिन मृतकों के परिवारजनों ने कहा कि ये उनकी आंखों में धूल झोंकने की कोशिश है.
सवाल उठते रहे कि किसने पहले गोली चलाई. क्या सैनिकों ने आत्मरक्षा में कदम उठाया या फिर 13 निहत्थे आम नागरिकों की ब्रितानी सैनिकों ने राह चलते हत्या कर दी?
इस घटना के बाद उत्तरी आयरलैंड के लिए संघर्ष कर रही आयरिश रिपबलिक्न आर्मी के सदस्यों में ज़बरदस्त बढ़ोतरी हुई.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसकी काफ़ी आलोचना हुई.
लेकिन इन सबके बावजूद 25 साल बाद यानि 1998 में प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने हाई कोर्ट के पूर्व जज लॉर्ड सैविल के नेतृत्व में इसकी पूरी जांच का आदेश दिया.
ये रिपोर्ट अब पूरी हो गई है और मृतकों के परिवारजनों को दिखाई गई है.
कुल पांच हज़ार पन्नों की इस रिपोर्ट में जो भी हो लेकिन ब्रितानी इतिहास में इसकी जगह बन चुकी है.
अगर इन मौतों को ग़ैरक़ानूनी माना गया तो उन सैनिकों को अदालत में पेश होना पड़ सकता है.
ये सैनिक कह चुके हैं कि पहले उन पर गोली चलाई गई थी.












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