किर्गिस्तान हिंसा : 78 भारतीय सुरक्षित बिश्केक लाए गए (राउंडअप इंट्रो-1)

सोमवार रात को 77 भारतीय छात्रों और एक प्रोफेसर को ओश से हवाई जहाज के जरिये बिश्केक लाया गया। 38 अन्य छात्रों को ओश से जलालाबाद लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस बीच विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि सभी भारतीय सुरक्षित हैं।

किर्गिस्तान में भारत की राजदूत ज्योति स्वरूप स्वयं भारतीयों को सुरक्षित निकालने के कार्य की निगरानी कर रही हैं।

इस बीच हिंसा बढ़ने की वजह से उज्बेक समुदाय के हजारों लोग अपने घरों को छोड़कर भागने को विवश हो गए हैं। इस बीच उज्बेक अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों का कहना है कि हिंसा में उनके समुदाय के कम से कम 500 लोग मारे गए हैं। रेडक्रास का कहना है कि कई शवों की बिना पहचान किए ही दफना दिया गया है।

समाचार एजेंसी एकेआई के अनुसार किर्गिस्तान के दक्षिणी शहरों में किर्गिज और उज्बेक समुदाय के बीच गुरुवार को भड़की हिंसा में अब तक 1685 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं।

हिंसा फैलने के बाद उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की सीमाओं को बंद कर दिया गया। उपद्रवियों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया और कई बाजारों को लूट लिया गया।

उज्बेक और किर्गिज समुदाय के नेताओं ने रविवार को सुलह वार्ता शुरू करने पर सहमति जताई थी।

इस बीच रूसी राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव ने किर्गिस्तान की प्रधानमंत्री रोजा ओतुनबायेवा से टेलीफोन पर बात की है। समझा जाता है कि वह हिंसा पर काबू पाने के लिए सैन्य सहायता देने पर विचार कर रहे हैं। एक सप्ताह पहले वह इसी तरह के अनुरोध को हालांकि खारिज कर चुके हैं।

मेदवेदेव की प्रवक्ता नतालिया तिमाकोवा ने कहा कि राष्ट्रपति ने इस बात जोर दिया कि देश में कानून और व्यवस्था की स्थिति बहाल की जाए और सामुदायिक संघर्षो में जान माल का नुकसान जल्द से जल्द रोका जाना चाहिए।

इस बीच किर्गिस्तान की अंतरिम सरकार ने पूरे जलालाबाद क्षेत्र में कर्फ्यू लगा दिया है।

किर्गिस्तान की अांतरिक सरकार ने शनिवार को एक आदेश पारित करते हुए पुलिस और सुरक्षा बलों को दंगों पर काबू पाने के लिए दंगाइयों को देखते ही गोली मारने का हुक्म दे दिया।

यहां ओश और जलालाबाद शहरों में 116 भारतीय फंसे हुए हैं और भारतीय दूतावास उन्हें सहायता उपलब्ध कराने की हरसंभव कोशिश कर रहा है। इन भारतीयों में ज्यादा तादाद छात्रों की है।

भारतीयों के वहां फंसे होने के मुद्दे पर विदेश मंत्रालय ने सोमवार को एक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि दक्षिण किर्गिस्तान में हिंसा प्रभावित जलालाबाद में 15 छात्र तथा ओश में 99 छात्र, एक प्रोफेसर और एक व्यवसायी फंसे हुए हैं।

मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, "हमारा दूतावास वहां फंसे कई भारतीयों तथा विदेश विभाग और सुरक्षा एजेंसियों सहित किर्गिस्तान की सरकार के संबंधित विभागों के साथ निरंतर संपर्क बनाए हुए है।"

विदेश मंत्रालय ने कहा है, "भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं।"

बयान में कहा गया है, "बिश्केक में हमारा दूतावास हालात पर करीबी से नजर रखे हुए है और हालात अनुकूल बनाने के लिए जल्द ही अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।"

हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में फंसे छात्र अपनी सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं।

ओश से जहीर खान नाम के एक भारतीय छात्र ने टाइम्स नाउ चैनल को फोन पर बताया, "किसी भी छात्र की मौत किसी भी क्षण हो सकती है।"

जहीर ने बताया कि हिंसा की वजह से भारतीय छात्र घरों तक ही सिमटे हुए हैं।

अमृत दास नाम के एक अन्य छात्र ने बताया, "मेरे घर के साथ वाली इमारत जल रही है। हम लोग अपने घर में फंसे हुए हैं।" सड़कों पर झड़पों की वजह से छात्र अपने घरों को लौटने के लिए हवाई अड्डे भी नहीं पहुंच सकते।

जलालाबाद में पढ़ने वाली सुमिता ने बताया कि छात्रों के पास खर्च करने को पैसे भी नहीं बचे हैं।

छात्रों ने शिकायत की है कि अधिकारियों ने उनसे अपने घरों को अंदर से बंद रखने को कहा है। कुछ छात्रों का कहना है कि बिजली, पानी और घरेलू गैस की आपूर्ति बंद कर दी गई है।

दुकानें और बाजार बंद रहने से खाद्यान्नों और दवाओं की किल्लत से दक्षिणी किर्गिस्तान में मानवीय स्थिति जटिल हो गई है।

सामूहिक सुरक्षा संधि संगठन (सीएसटीओ) के अधिकारियों की सोमवार को बैठक होगी। जिसमें संकट को सुलझाने के तरीकों और हिंसा प्रभावित किर्गिस्तान में शांति रक्षक सेना की तैनाती की संभावना पर विचार किया जाएगा। सीएसटीओ में किर्गिस्तान, रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकस्तान, उज्बेकिस्तान और ताजिकिस्तान शामिल हैं। अप्रैल में राष्ट्रपति कुरमानबेक बाकियेव के सत्ता से बेदखल होने के बाद से ही वहां तनाव बढ़ गया था।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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