महंगाई दर पहुंची दहाई अंकों पर, सरकार बेफिक्र
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जब-तब देश के सामने आर्थिक विकास दर को दहाई अंकों में ले जाने के लक्ष्य की बात करते रहते हैं। इसके अलावा पिछले 6 महीनों से केंद्र सरकार महंगाई घटाने के उपायों की यदाकदा चर्चा करती रहती है। आर्थिक विकास दर या देश का सकल घरेलू उत्पाद दर भले ही दहाई अंकों का ना छुए लेकिन महंगाई के आंकड़े हर महीने नये कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं।
खाद्यान्नों और ईंधन के दाम बढ़ने की वजह से मई में देश की वार्षिक महंगाई दर ने दहाई का आंकड़ा छू लिया और यह 10.16 फीसदी हो गई। अप्रैल में यह दर 9.59 फीसदी थी। मई 2009 में वार्षिक मुद्रास्फीति की दर 1.38 प्रतिशत थी। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने खाद्यान्न की कीमत 16.49 प्रतिशत बढ़ी जबकि अप्रैल में 16.87 प्रतिशत बढ़ी थी, जबकि मई महीने में ईंधन की कीमते 13.05 प्रतिशत बढ़ीं।
देश की सरकार महंगाई पर लगाम लगाने पर पूरी तरह विफल साबित हुई है। आलम ये है कि आम आदमी खाद्यान्न और दूसरी जरूरी चीजों को लेकर भीषण महंगाई का सामना करने पर मजबूर है। जिसका सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। महंगाई का सीधा फायदा देश के जमाखोर और जरूरी चीजों की कालाबाजारी करने वाले दलाल और बिचौलिए उठा रहे हैं। केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इन बिचौलियों पर लगाम कसने के बजाय एक-दूसरे पर दोषारोपण कर जनता के सामने हर बार किसी नाटक का दृश्य सा उपस्थित कर देती हैं। चारों ओर से शोषण का शिकार हो रही जनता का गुस्सा ऐसे में फूट पड़ना कोई अनहोनी बात नहीं है।












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