अर्जुन सिहं के बचाव में प्रणव मुखर्जी

प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि वारेन एंडरसन को छोड़ने का फ़ैसला भोपाल की क़ानून व्यवस्था को ध्यान मे रख कर किया गया था. कोलकाता में पत्रकारों से बात करते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा, "अर्जुन सिहं उसी वक़्त एक अख़बार को दिए गए ब्यान में कह चुके है कि उस वक़्त भोपाल में लोगों की भावनाएँ उग्र थीं और क़ानून व्यवस्था बिगड़ रही थी. ऐसे हालात में एंडरसन को भोपाल से बाहर भेजना ज़रुरी था."
प्रणब मुखर्जी ने ये बयान देकर कोशिश की है कि इस मुद्दे को बिना किसी को सीधे तौर पर ज़िम्मेदार ठहराए ख़त्म किया जा सके. भोपाल गैस त्रासदी का फ़ैसला आने के बाद कांग्रेसी नेता लगातार अर्जुन सिंह पर निशाना साधत रहें हैं. लेकिन अर्जुन सिंह ने अभी तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
जानकार मानते है कि कांग्रेस पार्टी नहीं चाहती कि इस मुद्दे पर अर्जुन सिंह कुछ बोले और शायद यही वजह है की अर्जुन सिहं के बचाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रणब मुखर्जी आगे आए है.जानकार ये भी मानते है कि अर्जुन सिहं के बचाव में वरिष्ठ नेता प्रणवव मुखर्जी के आने के बाद बाक़ी पार्टी नेताओं के बयानों पर लगाम लगेगी.
1984 में भोपाल गैस कांड के दौरान अर्जुन सिंह मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री थे. भोपाल गैस त्रासदी मामले में सात जून को अदालत ने आठ लोगों को दोषी क़रार दे 2-2 साल की सज़ा सुनाई थी.
इस मामले में यूनियन कार्बाइड के तत्कालीन प्रमुख वॉरेन एंडरसन फ़रार घोषित किये गए थे जिसके बाद ये बहस भी शुरू हो गई थी कि आख़िर वॉरन एंडरसन कैसे भारत छोड़कर जाने में सफल हुए. गैस हादसे के 4-5 दिन बाद यानी सात दिसंबर को एंडरसन भोपाल पहुंचे थे और उन्हें हवाई अड्डे पर ही गिरफ़्तार कर लिया गया था.
लेकिन उसी दिन कुछ ही घंटों के बाद उन्हें ना केवल ज़मानत मिल गई यहां तक की मध्यप्रदेश राज्य के सरकारी विमान में उन्हें दिल्ली भेजा गया.एंडरसन उसी दिन दिल्ली से अमरीका चले गए थे. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने फ़ैसला आने के बाद अर्जुन सिंह को पत्र लिखकर जवाब भी माँगा थी कि वे एंडरसन के भारत से जाने से जुड़ी तमाम घटनाओं पर स्पष्टीकरण दें.
इसके बाद से ही उन्हें लगातार विपक्षी दलों और अपनी ही कांग्रेस पार्टी के कई नेताओं के तीखे ब्यानों का सामना करना पड़ रहा है.












Click it and Unblock the Notifications