84 के दंगों को 'नरसंहार' बताने वाला प्रस्ताव कनाडा में पेश
गुरमुख सिंह
टोरंटो, 12 जून (आईएएनएस)। कनाडा की संसद में गत गुरुवार को भारतीय मूल के एक कनाडाई सांसद ने वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों को नरसंहार करार देने संबंधी प्रस्ताव पेश किया।
न्यूटन-नार्थ डेल्टा से सांसद सुख धालीवाल को पंजाबी बहुल निर्वाचन क्षेत्र ब्रेम्पटन वेस्ट के सांसद एंड्रयू ने भी उनका समर्थन किया। इस अवसर पर धालीवाल ने कहा, "1984 में भारत में हुए त्रासद घटनाक्रम के बारे में कनाडियाई लोगों की ओर से मैं यह प्रस्ताव पेश कर रहा हूं।"
इस प्रस्ताव पर कथित तौर पर 10,000 लोगों के दस्तखत हैं। धालीवाल ने कहा कि याचिकाकर्ता कनाडा सरकार से इस बात को मान लेने का अनुरोध किया है कि भारत में नवंबर 1984 में सिख समुदाय के खिलाफ हिंसा, बलात्कार और हत्याओं का संगठित अभियान चला था।
उन्होंने कहा, "आखिरकार कनाडा को मानना चाहिए कि इन संगठित रूप से की गई ये हजारों हत्याएं संयुक्त राष्ट्र समझौते के तहत नरसंहार थी।"
दोनों सांसद विपक्षी लिबरल पार्टी से ताल्लुक रखते हैं जिसके नेता माइकल आइगनेटिफ ने खुद को इस प्रस्ताव से अलग रखा है।
आलोचकों का कहना है कि यह प्रस्ताव प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को शर्मिदा करने का प्रयास है। सिंह इस महीने के आखिर में यहां जी-20 समूह की बैठक में हिस्सा लेने के लिए आ रहे हैं।
उधर, इस प्रस्ताव के समर्थक एवं न्यूयार्क से गतिविधियां चलाने वाले संगठन सिख फॉर जस्टिस के कानूनी सलाहकार गुरपतवंत सिंह पन्नू ने कहा कि सिख समुदाय के नेताओं ने प्रधानमंत्री से मुलाकात करने का अनुरोध भेजा है। वह विचार को गलत ठहराया चाहते हैं कि कनाडा का सिख समुदाय किसी तरह के आतंकवाद या अलगाववाद के समर्थन में है।
उन्होंने कहा, "सिख समुदाय भारत को अपनी जन्मभूमि मानता है और उसे आर्थिक रूप से फलते-फूलते देखना चाहता है।"
उन्होंने कहा कि वे सिर्फ इतना ही चाहते हैं कि भारत सन 84 के जनसंहार के पीड़ितों को न्याय दिलाने में जिम्मेदारी से काम करे। उनका कहना है कि इससे विश्व में भारत की साख बढ़ेगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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