झारखण्ड के विधायक नए चुनाव के पक्ष में नहीं
रांची, 12 जून (आईएएनएस)। झारखण्ड की विभिन्न पार्टियों के विधायक मध्यावधि चुनाव के पक्ष में नहीं हैं, उन्हें राष्ट्रपति शासन जारी रहना भी मंजूर नहीं है। झारखण्ड मुक्ति मोर्चा प्रमुख शिबू सोरेन के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद राज्य में एक जून को राष्ट्रपति शासन लागू हुआ था।
इन दिनों लगभग आठ कांग्रेस विधायक नई दिल्ली में हैं और वे केंद्रीय नताओं को राज्य में नई सरकार के गठन के लिए मनाने में जुटे हुए हैं।
कांग्रेस विधायक दल के नेता राजेंद्र प्रसाद सिंह ने शनिवार को बताया, "राज्य में एक भी विधायक चुनाव नहीं चाहता।"
उन्होंने कहा, "कांग्रेस राज्य में वैकल्पिक सरकार गठन के विरोध में नहीं है। लेकिन कांग्रेस और इसके घटक सहयोगी झारखण्ड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक (जेवीएम-पी) के पास विधायकों की पर्याप्त संख्या नहीं है।"
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस राज्य में सरकार गठन के लिए झारखण्ड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की पहल के इंतजार में है।
सिंह ने आईएएनएस को बताया, "हमारी पार्टी के नेता झामुमो की तरफ से आने वाले किसी हुक्म को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।"
झामुमो के विधायक भी नए चुनाव के पक्ष में नहीं हैं। पार्टी विधायक साइमन मरांडी ने कहा, "हम इस बात पर जोर दे रहे हैं कि राज्य में सरकार गठन के लिए सभी पार्टियों को एक मंच पर लाया जाए।"
राष्ट्रीय जनता दल की विधायक अन्नपूर्णा देवी ने कहा, "विधानसभा चुनाव होने के पांच महीने बाद ही फिर से चुनाव कराना उचित नहीं है। बड़े दलों को सरकार गठन की जवाबदेही लेनी चाहिए।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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