'अफ़ग़ानिस्तान में और ब्रितानी फौज नहीं'

'अफ़ग़ानिस्तान में और ब्रितानी फौज नहीं'

ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन अचानक ही अफ़ग़ानिस्तान की यात्रा पर पहुँचे हैं और वहाँ उन्होंने राष्ट्रपति हामिद करज़ई से वार्ता की है.

इसके बाद एक पत्रवार्ता में उन्होंने कहा कि ब्रिटेन की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की दृष्टि से अफ़ग़ानिस्तान सबसे अहम है लेकिन वे अफ़ग़ानिस्तान में और ब्रितानी फ़ौज नहीं भेज रहे हैं.

हालांकि उन्होंने सड़कों के किनारे होने वाले विस्फोटों से निबटने लिए अतिरिक्त देने की घोषणा की है.

प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद यह डेविड कैमरन की पहली अफ़ग़ानिस्तान यात्रा है.

उनकी यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब पिछले एक हफ़्ते में तालिबान के ख़िलाफ़ चल रहे संघर्ष में पश्चिमी देशों के बीस सैनिकों की मौत हुई है.

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई से उनकी मुलाक़ात पिछले महीने हुई थी जब वे अमरीका के दौरे से लौटते हुए लंदन में रुके थे.

जबकि कैमरन ने पिछले दिसंबर में हेलमंद प्रांत का दौरा किया था. तब वे विपक्ष के नेता थे.

गुरुवार को राष्ट्रपति करज़ई के निवास पर उन्होंने घोषणा की है कि सड़क के किनारे विस्फोटकों की समस्या से निबटने के लिए ब्रितानी सरकार 6.70 करोड़ पाउंड की अतिरिक्त राशि देगी.

लेकिन उन्होंने अतिरिक्त सैनिक भेजने की संभावना से इनकार कर दिया. इस समय अफ़ग़ानिस्तान में दस हज़ार ब्रितानी सैनिक हैं और 500 विशेष सैनिक हैं.

उन्होंने अफ़ग़ान सेना को और मज़बूत करने के लिए भी सहायता देने की घोषणा करते हुए कहा है कि देश की स्थिरता के लिए यह अहम साल है.

उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान-ब्रिटेन के संबंधों को बहुत महत्वपूर्ण बताया.

कैमरन ने अफ़ग़ानिस्तान में स्थिति का जायज़ा लेने के लिए विदेश मंत्री विलियम हेग, रक्षा मंत्री लियाम फ़ॉक्स और अंतरराष्ट्रीय विकास मामलों के मंत्री एंड्र्यू मिचेल को भी वहाँ भेजा है.

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