भोपाल त्रासदी: फ़ैसले पर अंसतोष

सबसे कड़ी टिप्पणी तो खुद क़ानून मंत्री वीरप्पा मोइली की ओर से आई. मोइली ने इस फ़ैसले को 'जस्टिस बरीड" यानी इंसाफ़ को दफ़ना दिया गया, जैसे कड़े शब्दों को इस्तेमाल किया. क़ानून मंत्री की ये तल्ख़ टिप्पणी उनके असंतोष को जाहिर करती है. उनका सुझाव था कि इस तरह के मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट होनी चाहिए और दोषियों को जल्द से जल्द क़ानून के दायरे में लाया जाना चाहिए.
सरकार को सलाह
प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने केंद्र सरकार को इस फ़ैसले से सीख लेने की सलाह देते हुए कहा कि परमाणु उत्तरदायित्व विधेयक पर सरकार को फिर से गौर करना चाहिए. भाजपा प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी से सीख लेनी चाहिए, लेकिन यूपीए सरकार इससे कोई सबक लेने को तैयार नहीं है और परमाणु दुर्घटना की स्थिति में कंपनियों के उत्तरदायित्व सीमित करने का विधेयक लाने पर तुली हुई है.
रविशंकर प्रसाद का कहना था कि इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील की जानी चाहिए. सीपीआई नेता डी राजा ने कहा कि केंद्रीय जाँच एजेंसी विदेशी अभियुक्तों को क़ानून के दायरे में लाने में असफल रही है. डी राजा का कहना था,'' दो साल की सज़ा एक तो देर से मिली और ये मामूली सज़ा है. दुख की बात ये है कि सभी को तुरंत ज़मानत मिल गई.''
कांग्रेस नेता जनार्दन द्विवेदी ने भी इस फ़ैसले पर असंतोष जाहिर किया है. ग़ौरतलब है कि भोपाल गैस त्रासदी मामले में अदालत ने सोमवार को आठ दोषियों को दो-दो साल की सज़ा सुनाई थी और एक-एक लाख का जु्र्माना भी लगाया था. लेकिन सज़ा सुनाए जाने के बाद ही 25 हज़ार रुपए के मुचलके पर दोषियों को ज़मानत भी मिल गई.












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